न्यूजर्सी। फेरान टोरेस के शानदार गोल के साथ ही स्पेन ने अर्जेंटीना को हराकर 16 साल के बाद एक बार फिर फीफा विश्वकप फुटबॉल खिताब जीता है। इस मैच में स्पेन की जीत के साथ ही अर्जेंटीना के कप्तान लियोनल मेसी का लगातार दूसरी बार खिताब जीतने का सपना भी टूट गया। स्पेन की जीत में टोरेस की सबसे अहम भूमिका रही हालांकि ये गोल अकेले टोरेस ने नहीं किया बल्कि यह टीम के दो शीर्ष खिलाड़ियों और दो स्थानापन्न खिलाड़ियों की सहायता के कारण संभव हुआ। जिसकी नींव मैच के महत्वपूर्ण मोड़ पर रखी गई। मैच जब अपने चरम पर था तभी अतिरिक्त समय के दूसरे हाफ की शुरुआत में ही अर्जेंटीना को बड़ा झटका लगा। 93वें मिनट में एंजो फर्नांडिस को दूसरा पीला कार्ड दिखाये जाने के कारण मैदान से बाहर कर दिया गया। जिससे अर्जेंटीना की टीम को दस खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा। स्पेन ने इसका पूरा लाभ का पूरा उठाया और गोल दागने की रणनीति को अंजाम दिया। read more:https://khabarentertainment.in/staff-nurse-accuses-blood-center-operator-of-sexual-harassment-intimidation-and-mental-harassment-case-registered/इसके बाद जब स्टार खिलाड़ी लामिन यमाल ने दाहिने विंग से गेंद को बड़ी कुशलता से लेकर उसे पेड्रो पोरो की ओर बढ़ाया। पोरो का दाहिने पैर से लगाया गया क्रॉस भले ही थोड़ा बाहर की ओर जा रहा था, लेकिन तभी 75वें मिनट में मैदान पर आए सब्स्टीट्यूट निको विलियम्स ने एक शानदार हेडर से गेंद को दिशा दी और उसे फेरान टोरेस के कदमों में पहुंचा दिया। एक और सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी के तौर पर आए टोरेस ने बिना कोई समय गंवाए, अपने बाएं पैर से गेंद को गोल पोस्ट की तरफ धकेला। अर्जेंटीना के गोलकीपर एमिलियानो मार्तिनेज के पास इसे रोकने का कोई मौका नहीं था और इस प्रकार 106वें मिनट में किये इस गोल से स्पेन ने 1-0 की बढ़त लेने के साथ ही अर्जेंटीनाई प्रशंसकों को सदमे में डाल दिया। इसके बाद ये बढ़त अंत तक बनी रही। गोल दागने के बाद, जीत के हीरो टोरेस ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा, यह 47 मिलियन लोगों द्वारा किया गया गोल था। मैं बेहद खुश हूं। उन्होंने अपनी पिछली आलोचनाओं को याद करते हुए कहा, विश्व कप में मेरी काफी आलोचना हुई थी पर शायद यह गोल मेरी किस्मत में था। जो अधिकारी होते हैं और भरोसा रखते हैं, भगवान उनकी झोली भर देता है। यह गोल वास्तव में एक खिलाड़ी के धैर्य और दृढ़ विश्वास का प्रतीक बन गया।इस जीत के साथ, रोड्री की कप्तानी वाली स्पेनिश टीम ने 16 साल के अपने खिताबी सूखे को समाप्त किया। गौरतलब है कि स्पेन ने आखिरी बार 2010 में फीफा विश्व कप का खिताब अपने नाम किया था। तब भी, 16 साल पहले स्पेन के सामने विश्व कप के फाइनल में नीदरलैंड की टीम थी और स्पेन ने उस मैच में भी अतिरिक्त समय में ही जीत हासिल की थी। वहीं अब, 16 साल बाद, टीम ने अर्जेंटीना के खिलाफ उसी इतिहास को दोहराया है।