हिंदी दिवस पर हुआ संगोष्ठी का आयोजन 

नवाबगंज उन्नाव।हिंदी दिवस पर विजय कंप्यूटर टाइपिंग प्रशिक्षण संस्थान में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए।     प्रशिक्षिका  नीतू सिंह  ने माँ सरस्वती एवं भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर दीप प्रज्वलित किया। इसके पश्चात अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि आज ही के दिन हिंदी भाषा को 14 सितम्बर सन 1949 को संविधान द्वारा मान्यता प्रदान की गई थी।हिंदी भाषा का जन्म संस्कृत भाषा से हुआ। हिंदी भाषा अनेक क्षेत्रीय भाषाओं में भी विभक्त है, जो अलग-अलग क्षेत्रों की पहचान से जानी जाती है। जब हमारे देशवासी स्वाधीनता के लिए संघर्ष कर रहे थे, उस समय भी हिंदी भाषा स्वाधीनता की मुख्य हथियार थी। अनेक कवि, लेखक, प्रवक्ता अपने विचारों, कविता के माध्यम से स्वतंत्रता की अलख जगा रहे थे।हिंदी भाषा के विस्तार में हिंदी साहित्य सम्मेलन (प्रयागराज) का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।read more:https://pahaltoday.com/demand-to-remove-government-country-liquor-shop-villagers-stage-protest-at-the-collectorate/#google_vignetteसम्मेलन के प्रयासों से विश्व स्तर पर जो हिंदी के प्रचार में सफलता मिली, वह अति सराहनीय काम था। सम्मेलन के द्वारा समय-समय पर प्रचार हेतु सम्मेलनों का आयोजन भी किया जाता रहा है। तथा हिंदी के माध्यम से स्वाध्याय करने वाले परीक्षार्थियों की परीक्षा लेकर अनेक सम्मानजनक उपाधियाँ भी वितरित की जाती हैं, जिनमें प्रमुख रूप से प्रथमा, मध्यमा, साहित्य रत्न आदि शामिल है। हिन्दी साहित्य सम्मेलन को उत्तर प्रदेश की धरोहरों में गिनती की जाती है। हिन्दी साहित्य सम्मेलन की स्थापना 1 मई सन 1910 ई० में पण्डित मदन मोहन मालवीय जी ने प्रयागराज में किया था। तब से आज तक संस्था विस्तार हिन्दी के प्रचार प्रसार का कर रही है। आज हिन्दी का विस्तार विश्व के लगभग समस्त क्षेत्रों में हो रहा है। विज्ञान के क्षेत्र में चिकित्सा, रक्षा, अन्तरिक्ष में भी देखने को मिल रहा। अब हिन्दी भाषा किसी के भी अन्य भाषा से तुलनात्मक पहचान की मोहताज नहीं है।इस गोष्ठी में काव्य पाठ एवं विचार व्यक्त करने वाली प्रमुख छात्राये लक्ष्मी, राजपूत, दिव्यांशी, हरिप्रिया, आयुषी, राखी, दर्पण, अंशिका मिश्रा, दीक्षा, आँचल सेनी, ओजस्वी सिंह, दीपाली सहित कई लोग मौजूद रहे।

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