साध्वी जानकी ने दंडी स्वामी असंभवनंद सरस्वती का लिया आशीर्वाद

बाराबंकी। गुरु पूर्णिमा पर बुधवार को जिले में जगह-जगह अनुयायियों ने अपने-अपने गुरुओं, संत-महंतों की पूजा अर्चना की। गुरुओं ने भी शिष्यों को आशीर्वाद दिया। श्री जगजीवन दास जी की तपोभूमि श्री कोटवाधाम, किन्तूर के अलावा रामनगर के ग्राम मलौली स्थित श्रीपंच मुखी हनुमान धाम दंडी संन्यासी आश्रम में विविध कार्यक्रम आयोजित कर गुरुओं के प्रति श्रद्धाभाव दिखाया गया। जहां दंडी स्वामी श्रीअसंभव सम्भावनंद सरस्वती ने गुरुदेव की पादुका का विधि विधान से पूजन किया। इस मौके पर 56 विशिष्ट व्यंजनों के अन्नकूट प्रसाद का महाभोग लगाया गया। इसके अलावा श्रीपंच मुखी हनुमान धाम दंडी संन्यासी आश्रम में साध्वी जानकी वैष्णों सहित अन्य सभी शिष्यों ने दंडी स्वामी श्रीअसंभव सम्भावनंद सरस्वती की पूजा कर आशीर्वाद लिया। दंडी स्वामी श्रीअसंभव सम्भावनंद सरस्वती ने बताया कि भारतीय संस्कृति में गुरू का स्थान अत्यंत उच्च और पूज्यनीय माना गया है। ‘गु’ का अर्थ है अंधकार और ‘रू’ का अर्थ है प्रकाश।read more;https://khabarentertainment.in/prof-dr-rajendra-rajput-receives-guru-shree-2026-award-at-national-level-brings-honour-to-ghazipur/ जो अज्ञान के अंधकार ाके मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाए, वही सच्चा गुरू होता है। गुरू हमें सही दिशा दिखाते है, जीवन सार्थक बनाते है। गुरू पूर्णिमा के प्रति श्रद्धा, समर्पण और कृतज्ञता व्यक्त करने का एक पावन अवसर होता है। उन्होंने बताया कि कलियुग में योग्य गुरु शिष्य बड़ी असंभव युक्ति है। बिना ईश्वर की कृपा के योग्य गुरु और गुरु को काबिल शिष्य मिलना मुश्किल है। वहीं ग्राम भैरमपुर में मनसेवर भारती मठ के मठाधीस्वर सच्चिदानन्द भारती जी के आश्रम पर आयोजित गुरु पूर्णिमा पर्व कार्यक्रम में पहुंचकर विधान परिषद सदस्य अंगद सिंह ने पूजा अर्चना करके पूज्य संत गुरुजनों का आशीर्वाद प्राप्त किया। वहीं जिले के मठ-मंदिरों में स्थानीय के अलावा दूरदराज से शिष्यों ने पहुंचकर अपने गुरु की सेवा, पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *