स्कूलों में प्रोफेशनल कोर्स बंद: 20 हजार बच्चों का भविष्य अधर में

 हल्द्वानी। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में युवाओं को हुनरमंद बनाने पर बल दिया गया है। स्कूल से ही कौशल परक शिक्षा के लिए प्रेरित किया जा रहा है। रोजगार की संभावनाओं को देख बच्चों का रुझान भी इस ओर बढ़ रहा है। उत्तराखंड बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा से इसका पता चलता है, जिसमें पिछले साल 16961 विद्यार्थियों ने सूचना प्रौद्योगिकी, पर्यटन और ब्यूटी-वेलनेस जैसे प्रोफेशनल कोर्स चुने थे। इस साल संख्या बढ़कर 21850 पहुंच गई। इन पाठ्यक्रमों में विद्यार्थी बढ़ रहे हैं, लेकिन प्रदेश के 200 सरकारी स्कूलों में संचालित प्रोफेशनल कोर्स एक अप्रैल से बंद कर दिए गए हैं। अधिकारियों ने एक पत्र जारी कर रोक लगा दी है, लेकिन इससे 20 हजार से ज्यादा बच्चे अधर में फंस गए हैं। 10वीं और 12 वीं के विद्यार्थियों के सामने सबसे ज्यादा संकट की स्थिति है। क्योंकि उन्होंने पाठ्यक्रम तो चुना है, लेकिन पढ़ाने वाला कोई नहीं है। कक्षाएं कब से शुरू होंगी इसे लेकर जिम्मेदारों के पास कोई जवाब नहीं है। इससे सिस्टम की गंभीरता और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। समग्र शिक्षा की योजना के तहत सरकारी स्कूलों प्रोफेशनल कोर्सों का संचालन किया जा रहा था।read more:https://pahaltoday.com/sdm-administered-oath-to-nominated-councilors-including-satish-jaiswal/#google_vignette इसके लिए नोएडा की कंपनी विजन इंडिया सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड से पांच वर्ष के लिए अनुबंध किया गया था। जिसमें 200 विद्यालयों में 255 व्यावसायिक शिक्षा लैब और 28 स्पोक विद्यालयों में प्रोफेशनल कोर्स संचालित किए जा रहे थे। समग्र शिक्षा राज्य परियोजना निदेशक ने 31 मार्च को अनुबंधित फर्म को पत्र जारी कर कोर्सों का संचालन बंद करने के निर्देश दिए थे। स्कूलों में प्रोफेशनल कोर्स बंद करने पर राजकीय शिक्षक संघ ने भी सवाल उठाए हैं। संगठन के कुमाऊं मंडल अध्यक्ष डा. रविशंकर गुसाईं और मंत्री भारतेंदु जोशी ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक को पत्र लिखा है। उन्होंने पाठ्यक्रम बंद किए जाने पर सवाल खड़े किए हैं। डा गुसाईं ने कहा है कि एनईपी में कौशल परक शिक्षा पर जोर दिया गया है, लेकिन नई नीति लागू करने वाले राज्य में कोर्सों को बंद कर दिया गया। यह बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ है। ऐसे में हाईस्कूल और इंटर के बच्चे कैसे पढ़ पाएंगे। वहीं निदेशक, माध्यमिक शिक्षा डा मुकुल सती ने कहा कि स्कूलों में अनुबंध के तहत व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे थे। अनुबंध पूरा होने पर फिलहाल शिक्षण स्थगित हुआ है। जल्द नई व्यवस्था बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

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