गाजियाबाद के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में मिला पोलियोवायरस

गाजियाबाद। भारत के पोलियो मुक्त अभियान को एक बड़ा झटका लगा है। गाजियाबाद के डूंडाहेड़ा स्थित एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) से लिए गए दूषित पानी के नमूने की जांच में वैक्सीन-व्युत्पन्न पोलियोवायरस (वीडीपीवी) टाइप-1 की पुष्टि हुई है। इस चौंकाने वाली रिपोर्ट के सामने आते ही स्थानीय स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। आनन-फानन में प्रशासन ने अलर्ट जारी करते हुए शहरी क्षेत्र की 12 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) के तहत 107 टीमों को तैनात किया है, जो घर-घर जाकर बच्चों की सेहत की जांच करेंगी और उन्हें पोलियो ड्रॉप्स पिलाएंगी। दरअसल, स्वास्थ्य विभाग द्वारा पोलियोवायरस की नियमित निगरानी के लिए हर महीने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के दूषित पानी का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा जाता है। इसी प्रक्रिया के तहत हाल ही में डूंडाहेड़ा एसटीपी से भी सैंपल लेकर दिल्ली की प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया था। सोमवार को विभाग को प्राप्त हुई इस जांच रिपोर्ट ने अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी, क्योंकि इसमें वीडीपीवी टाइप-1 वायरस सक्रिय पाया गया। रिपोर्ट मिलते ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) सभागार में आपात बैठक बुलाई गई, जिसमें पीएचसी प्रभारियों ने वायरस के स्रोत और इसके नियंत्रण पर गहन मंथन किया।read more:https://pahaltoday.com/mohsina-kidwai-passes-away-an-era-has-come-to-an-end/ बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार, चिन्हित किए गए क्षेत्रों में आशा, एएनएम और स्वास्थ्य कर्मियों की 107 टीमें डोर-टू-डोर सर्वे करेंगी। ये टीमें शून्य से पांच साल तक के बच्चों की सेहत की बारीकी से जांच करेंगी ताकि किसी भी संभावित संक्रमण को समय रहते पकड़ा जा सके। वायरस की पुष्टि होने के बाद मुख्य रूप से राजनगर, शास्त्रीनगर, बुलंदशहर रोड औद्योगिक क्षेत्र, दौलतपुरा, न्यू पंचवटी, घुकना, हिंडन विहार, कैला भट्टा, मिर्जापुर, विजय नगर-1 और 2 तथा खैराती नगर पीएचसी क्षेत्रों को इस सघन सर्वे अभियान में शामिल किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीन से उत्पन्न यह पोलियो वायरस उन बच्चों की आंतों में आसानी से पनपने और फैलने लगता है, जिनका पूर्ण टीकाकरण नहीं हुआ होता है। आशंका जताई जा रही है कि जिन रिहायशी इलाकों में स्वच्छता या सैनिटाइजेशन का स्तर खराब है, वहां किसी संक्रमित व्यक्ति के मल के माध्यम से यह वायरस बहकर सीवरेज प्लांट तक पहुंच गया होगा। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, यह वायरस उन बच्चों को लकवाग्रस्त (पैरालाइज्ड) कर सकता है जिनका टीकाकरण अधूरा है या जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहद कमजोर है। दूषित माहौल में यह एक बच्चे से दूसरे बच्चे में बहुत तेजी से फैलता है। जिला सर्विलांस अधिकारी ने बताया कि रूटीन जांच में इस तरह पोलियो वायरस का मिलना बेहद चिंता का विषय है। विभाग ने इस मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता पर लेते हुए अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों के हर एक बच्चे की सघन जांच कराकर जल्द से जल्द इस वायरस के मुख्य स्रोत (सोर्स) का पता लगाया जाएगा ताकि इसे आगे फैलने से रोका जा सके।

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