साहित्य की प्रभावशीलता तब और बढ़ जाती है, जब वह पाठकों को सृजन के लिए प्रेरित करे। समकालीन हिंदी कविता के चर्चित काव्य-संग्रह ‘विदा होती बेटियां’ से प्रभावित होकर एनटीपीसी सिंगरौली के अभिषेक केशरी ने पुस्तक की एक आकर्षक कलात्मक अनुकृति तैयार की है। उनकी यह प्रस्तुति साहित्य के प्रति सम्मान और कृति से गहरे भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक मानी जा रही है। डॉ. ओम प्रकाश के काव्य-संग्रह ‘विदा होती बेटियां’ ने प्रकाशन के बाद से साहित्यकारों, शिक्षाविदों, प्रशासनिक अधिकारियों और पाठकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई है।readmore:https://khabarentertainment.in/509-vidyut-sakhis-in-bijnor-receive-thermal-printers-instant-electricity-bill-receipts-will-now-be-available-at-doorsteps/बेटियों के जीवन, परिवार, रिश्तों, स्त्री-अनुभव, श्रमिक जीवन और सामाजिक सरोकारों पर आधारित यह संग्रह मानवीय संवेदनाओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। अभिषेक केशरी द्वारा तैयार की गई कलात्मक अनुकृति को साहित्य और कला के सुंदर संगम के रूप में देखा जा रहा है। यह केवल पुस्तक के आवरण का पुनर्सृजन नहीं, बल्कि एक संवेदनशील पाठक की रचनात्मक अभिव्यक्ति भी है, जो लेखक और पाठक के बीच आत्मीय संबंध को दर्शाती है। इस अवसर पर डॉ. ओम प्रकाश ने अभिषेक केशरी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी लेखक के लिए पाठकों का प्रेम और उनकी सृजनात्मक सहभागिता सबसे बड़ा सम्मान होता है। उन्होंने कहा कि यह कलात्मक प्रस्तुति उनके लिए किसी पुरस्कार से कम नहीं है। उल्लेखनीय है कि ‘विदा होती बेटियां’ का तीसरा संस्करण प्रकाशित हो चुका है। इस कृति पर समीक्षात्मक पुस्तक तैयार की जा चुकी है तथा विश्वविद्यालय स्तर पर शोध कार्य भी जारी है। अभिषेक केशरी की यह कलात्मक अनुकृति काव्य-संग्रह की बढ़ती लोकप्रियता और पाठकों के आत्मीय जुड़ाव का नया उदाहरण बनकर सामने आई है।