भारत ने विज्ञान को हमेशा राष्ट्र निर्माण और प्रगति से जोड़ा

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 133वें एपिसोड में देश के सिविल न्यूक्लियर प्रोग्राम की अहमियत को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत ने विज्ञान को हमेशा राष्ट्र निर्माण और प्रगति से जोड़ा है, और इसी सोच के साथ परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जा रहा है। मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सिविल न्यूक्लियर प्रोग्राम का असर सिर्फ ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका लाभ औद्योगिक विकास, स्वास्थ्य सेवाओं और कृषि क्षेत्र तक पहुंचा है। उन्होंने बताया कि खेती-किसानी से लेकर आधुनिक इनोवेशन तक, इस कार्यक्रम ने कई क्षेत्रों में नई संभावनाएं खोली हैं। अपने संबोधन में उन्होंने तमिलनाडु के कलपक्कम स्थित फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की हालिया उपलब्धि का विशेष उल्लेख किया। पीएम मोदी ने कहा कि इस रिएक्टर ने ‘क्रिटिकैलिटी’ हासिल कर ली है, जो परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण चरण होता है।read more:https://worldtrustednews.in/awareness-campaign-on-world-malaria-day-at-chc-syohara-health-workers-took-oath-for-eradication/ यह वह अवस्था है, जब रिएक्टर पहली बार स्व-स्थायी नाभिकीय श्रृंखला अभिक्रिया को सफलतापूर्वक संचालित करता है और ऑपरेशन के चरण में प्रवेश करता है। पीएम मोदी ने ब्रीडर रिएक्टर की विशेषता बताते हुए कहा कि यह तकनीक ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ भविष्य के लिए ईंधन भी तैयार करती है, जो इसे और अधिक उपयोगी बनाती है। उन्होंने मार्च 2024 में कलपक्कम में रिएक्टर की कोर लोडिंग के दौरान मौजूद रहने को भी याद किया और वैज्ञानिकों के योगदान की सराहना की। ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की प्रगति का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि देश की पवन ऊर्जा क्षमता 56 गीगावाट से अधिक हो चुकी है और पिछले एक वर्ष में ही लगभग 6 गीगावाट नई क्षमता जोड़ी गई है। उन्होंने सौर और पवन ऊर्जा को देश के भविष्य की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी बताया और नागरिकों से बिजली बचाने तथा स्वच्छ ऊर्जा अपनाने की अपील की। बुद्ध पहले से अधिक प्रासंगिक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भगवान गौतम बुद्ध के विचारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज के वैश्विक तनाव और संघर्ष के दौर में बुद्ध के शांति और आत्मविजय के संदेश पहले से अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। प्रधानमंत्री का यह संबोधन विज्ञान, ऊर्जा और आध्यात्मिक मूल्यों के संतुलन के जरिए देश के समग्र विकास की दिशा को रेखांकित करता है।

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