नगीना । गर्मी में कड़ी धूप व गर्मी से पौधों को बचाने के लिए उद्यान वैज्ञानिक डॉ प्रतिमा ने सिंचाई, नमी संरक्षण एवं धूप से बचाव के लिए कुछ टिप्स दिए हैं।
क्षेत्र में तापमान लगातार बढ़ने और लू चलने से मनुष्यों के साथ-साथ पेड़ पौधों की सेहत पर भी असर पड़ना शुरू हो गया है। घर एवं आँगन मे लगे पौधे सुबह पानी देने के बावजूद शाम तक मुरझाने लगे है I तेज धूप ,गर्म हवा, एवं तेजी से सूखती मिट्टी के कारण बाग-बगीचों की हरियाली फीकी पड़ रही है I ऐसे मे उद्यान वैज्ञानिक डॉ प्रतिमा का कहना है कि गर्मियों मे पौधों को केवल पानी देना काफी नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक तरीके से देखभाल करना जरूरी है I गर्म मौसम मे पौधों की जड़ों ,पत्तियों और मिट्टी तीनों की अलग-अलग जरूरते होती है I यदि सही समय पर सिचाई, नमी संरक्षण,एवं धूप से बचाव किया जाए तो पौधे भीषण गर्मी मे भी स्वस्थ रह सकते है I डॉ प्रतिमा ने बताया की पौधों को पानी देने का सबसे उपयुक्त समय सुबह सूर्योदय से पहले या शाम को सूर्यास्त के बाद है I इस समय दिया गया पानी जड़ों तक सीधे आसानी से पहुचता है,और पौधों को दिनभर की गर्मी सहने की ताकत देता हैread more:https://khabarentertainment.in/saharanpur-lucknow-passenger-train-expected-to-resume-operations/ I दोपहर मे पानी नहीं देना चाहिए, दोपहर मे पानी देने से गर्म मिट्टी मे तापमान अचानक बदलता है, जिससे जड़ों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है I मिट्टी मे नमी लंबे समय तक बनाए रखने के लिए मलचिग बेहद कारगर उपाय है,क्यारी या गमलों की ऊपरी सतह पर सूखी घास, पत्तिया या लकड़ी का बुरादा बिछाने से वाष्पीकरण कम होता है और मिट्टी ठंडी बनी रहती I इससे बार बार पानी देने की जरूरत भी कम पड़ती है I जब तापमान 40 डिग्री से ऊपर पहुच जाए तो पौधों को सीधी धूप से बचाना जरूरी है I इसके लिए ग्रीन नेट, जूट की छाया या बरामदे जैसे स्थानों का उपयोग किया जा सकता है I गमलों को पास-पास रखने से उनके आस -पास नमी बनी रहती है और लू का असर कम रहता है, गर्मी मे रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग कम किया जाना चाहिए I गोबर की खाद, वर्मी काम्पोस्ट पौधों की प्रतिरोधक छमता बढ़ाते है हाल ही में आयी तेज आंधी से आम के फलों को क्षति हुई है, वही बारिश हो जाने से इस फसल को संजीवनी भी मिली है,वर्षा से आम का उत्पादन बेहतर होगा, वर्षा से फल मे तेजी से बढ़ोतरी होने लगी है I किसानों को चाहिए कि ऐसे मे पोटेशियम नाइट्रेट पांच ग्राम प्रति लीटर छिड़काव करे ,जो फल विकास मे सहायक होगा इस समय मिट्टी मे नमी बनाए रखना बहुत ही आवश्यक है I फल मक्खी के समस्या से बचाव के लिए मिथाइल यूजिनॉल फेरोमन ट्रैप 10 ट्रैप प्रति हेक्टेर प्रयोग करना चाहिए जिससे किसानों व बाग स्वामियों को अधिक से अधिक लाभ मिल सके।