भदोही। नगर के मोहल्ला जमुंद से भदोही का ऐतिहासिक दुलदुल जुलुस लगभग दो सौ वर्षों से निकलता चला आ रहा है जो भदोही की गंगा जमुनी तहजीब व आपसी भाईचारे का मिसाल बना हुआ है। यह कदीमी दुलदुल जुलूस बुधवार 24 जून को पूर्व चेयरमैन स्व.मो. असगर अली खां के पुत्र अख्तर खां के आवास से बाद नमाज़ जोहर निकलेगा। दुलदुल जुलूस के अध्यक्ष अख्तर खां ने बताया कि भदोही का यह ऐतिहासिक दुलदुल जुलूस होता है जिसमे अक़ीदतमंद दुलदुल को दूध व जलेबी खिला कर अपनी-अपनी मन्नतो को पूरा करते हैं। कहा हज़ारो की तायेदाद मे दूरदराज से महिलाएं आकर नजरान-ए-अक़ीदत पेश करती हैं। वहीं मासूम बच्चे भी दुलदुल की ज्यारत व दूध जलेबी खिला कर शहीदाने कर्बला को खेराजे अकीदत पेश करते हैं।read more:https://pahaltoday.com/mission-shakti-team-made-women-and-girls-aware-2/ दुलदुल के जुलुस मे हज़ारो की तायेदाद में जहां मुस्लिम महिलायें रहती हैं तो वही हिन्दू महिलाएं भी अपनी आस्था लिए हुए दुलदुल को दूध जलेबी खिला कर मन की मुरादों को पूरा करती है और भदोही की वेरासत में पल रही गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल पेश किया जाता है। श्री खां ने बताया कि दुलदुल का जुलुस अपने क़दीमी रास्ते मोहल्ला जमुंद से होते हुए बाज़ार सलावत खां, अम्बर नीम तले, गोरियाना, पचभैया, मलिकाना, सोनराना, कसाई टोला होते हुए मेन रोड दाता कल्लन शाह तकिया होते हुए भरत टाकिज़ के पास स्थित अपने निजी कर्बला में दुलदुल को ठंडा किया जाता है। और फातेहा पढ़ शहीदाने कर्बला को नजरान-ए-अक़ीदत पेश किया जाता है। कहा जुलुस के साथ अखाड़ा मोहम्मदिया जमुंद अखाड़ा, कल्लन शाह तकिया के खिलाड़ियों ने जगह-जगह कला कौशल का प्रदर्शन कर कर्बला के मंजर को दर्शाते है तो वहीँ ढोल नगाड़े बजा कर मैदाने कर्बला में हुए जंग से पहले बजने वाले नगाड़े की याद दिलाते है। श्री खां ने भदोही वासियों से कहा मोहर्रम पर्व को सौहार्द वातावरण व आपसी भाईचारे के साथ मनाएं।