गाजीपुर जमानियां। नगर कस्बा बाजार स्थित शाही जामा मस्जिद में शुक्रवार को जुमा की नमाज के बाद पैगम्बर हजरत मोहम्मद साहब की जीवनी और उनकी पालक मां हलीमा सादिया की ओर से की गई परवरिश पर तकरीर हुई। मौलाना तनवीर रजा ने पैगम्बर मोहम्मद साहब के शुरुआती जीवन से जुड़े प्रसंगों को बयान करते हुए उनके प्रति हलीमा सादिया के प्रेम, स्नेह और ममता का विस्तार से वर्णन किया।
मौलाना तनवीर रजा ने बताया कि हलीमा सादिया, जिन्हें बीबी हलीमा के नाम से भी जाना जाता है, पैगम्बर मोहम्मद साहब की दूध पिलाने वाली मां थीं। शुरुआती बचपन में उन्होंने अत्यंत प्रेम और अपनत्व के साथ उनकी परवरिश की। उस समय हलीमा सादिया आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से थीं और मक्का में बच्चों को दूध पिलाने वाली अन्य दाइयों के साथ पहुंची थीं।तकरीर में बताया गया कि पैगम्बर मोहम्मद साहब के पिता का निधन उनके जन्म से पहले ही हो चुका था, इसलिए वे यतीम थे।
read more:https://pahaltoday.com/demand-to-remove-government-country-liquor-shop-villagers-stage-protest-at-the-collectorate/#google_vignette अन्य दाइयों द्वारा उन्हें लेने से इनकार किए जाने के बाद हलीमा सादिया ने उन्हें अपनी गोद में लिया और अपने बच्चे की तरह उनका पालन-पोषण किया।मौलाना ने बताया कि हलीमा सादिया के परिवार ने पैगम्बर मोहम्मद साहब को अपनाने के बाद घर में बरकत महसूस की। उनकी कमजोर ऊंटनी के तेज चलने और बकरियों के भरपूर दूध देने का उल्लेख भी तकरीर में किया गया। हलीमा सादिया उन्हें अपने कबीले बनी साद के ग्रामीण और खुले वातावरण में ले गईं, जहां उन्होंने स्नेह, ममता और पूरी देखभाल के साथ उनका लालन-पालन किया।उन्होंने कहा कि उस दौर में बच्चों को खुले ग्रामीण वातावरण में रखने की परंपरा थी। हलीमा सादिया ने पैगम्बर मोहम्मद साहब को अपने सगे बच्चों की तरह दूध पिलाया और उनकी देखभाल की। कुछ वर्षों तक उनके पास रहने के बाद उन्हें उनकी वालिदा हजरत आमिना को सौंप दिया गया।तकरीर के दौरान पैगम्बर मोहम्मद साहब के बचपन, उनके प्रति हलीमा सादिया के स्नेह और उनके शुरुआती जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों को श्रद्धा के साथ याद किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में नमाजी और स्थानीय लोग मौजूद रहे।