प्रेम, ज्ञान और तप से होती है प्रभु की प्राप्ति : पं. विष्णुधर द्विवेदी

जिगना। क्षेत्र के परमानपुर गाँव स्थित गंगा तट पर चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन व्यास पं. विष्णुधर द्विवेदी ने भगवान राम एवं श्रीकृष्ण की लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा श्रवण कर श्रद्धालु भक्तिभाव में सराबोर हो गए।व्यास जी ने कहा कि भगवान राम का प्राकट्य खीर से हुआ था। खीर चावल, दूध, चीनी और आग से बनती है। इसमें चावल परिश्रम, दूध विशुद्ध ज्ञान, चीनी प्रेम और आग तप का प्रतीक है। प्रभु की प्राप्ति के लिए मनुष्य को परिश्रम, ज्ञान, प्रेम और तप की आवश्यकता होती है।read more:https://pahaltoday.com/bhadohi-mahotsav-will-be-organised-in-the-city-from-15th-to-17th-may/
उन्होंने कहा कि न तो सूर्पनखा को राम मिले और न ही रावण को सीता मिली। राम कथा पूरी दुनिया को मर्यादा में रहकर जीवन यापन करने की कला सिखाती है। रामचरितमानस भारतीय जनमानस की जीवन रेखा है।कथा के दौरान उन्होंने कहा कि भगवान राम ने 14 वर्षों में रावण का वध किया, लेकिन रावण द्वारा फैलाई गई कुरीतियों को समाप्त करने में 11 हजार वर्ष लग गए। जब प्रत्येक व्यक्ति के मन में प्रेम का प्रादुर्भाव होगा, तभी रामराज्य का सपना साकार होगा।
इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि जब तक भगवान श्रीकृष्ण कारागार में रहे, तब तक संसार को आनंद नहीं मिला। जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण गोकुल अर्थात इंद्रियों के समूह में आए, आनंद की वर्षा होने लगी।कथा में यजमान रामनिवास पांडेय, जय देवी, कमलेश पांडेय, पप्पू, सुरेश, सुधीर, सुनील, सुजीत, दिव्यांश, निधि, लाल साहब, महेंद्र देव, श्रीकांत, आशीष, राधे, पीयूष, दिलीप सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

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