यमुना के बीहड़ से पंचायत की कुर्सी तक: ‘चुन्ना बाबा’ की सेवा गाथा, अब वकील बेटा थामेगा विरासत

फतेहपुर। राजनीति में जब सेवा का जज्बा हो और इरादे नेक हों तो बीहड़ की धूल से उठकर भी कोई जनता का मसीहा बन सकता है। यमुना तटवर्ती रायपुर भसरौल के रहने वाले कल्पनाथ द्विवेदी उर्फ ‘चुन्ना बाबा’ इसकी जीती-जागती मिसाल हैं। साधारण परिवार, तमाम संघर्ष, और विरोधियों की साजिशों के बीच भी चुन्ना बाबा ने गरीब-गुरबों की सेवा को अपना धर्म बना लिया। नतीजा आज क्षेत्र का बच्चा-बच्चा उन्हें ‘अपना मददगार बाबा’ कहता है।
*1. बीहड़ के दिन और सेवा की शुरुआत*
चुन्ना बाबा का बचपन अभावों में बीता। परिवार की माली हालत ठीक नहीं थी। विवादों और संघर्षों के चलते एक वक्त ऐसा भी आया जब उन्हें रायपुर भसरौल के बीहड़ों में दिन गुजारने पड़े। लेकिन कहते हैं न, ‘सोना तपकर ही कुंदन बनता है’। बीहड़ में रहते हुए ही उन्होंने ठान लिया कि अगर मौका मिला तो गरीब की आंख का आंसू जरूर पोंछेंगे।
धीरे-धीरे गांव-गिरांव में लोगों की छोटी-बड़ी मदद करते-करते वो सबके ‘चुन्ना बाबा’ बन गए। किसी की दवाई का इंतजाम, किसी के बच्चे की फीस, किसी के मुकदमे में पैरवी— बाबा का दरवाजा हर फरियादी के लिए खुला था। जनता ने इस सेवा को पहचाना और एकमत होकर उन्हें गांव का सरपंच चुन लिया।
*2. सरपंची में बदली गांव की तस्वीर*
सरपंच बनते ही चुन्ना बाबा को खुलकर काम करने का मौका मिला। उन्होंने ठान लिया कि गांव में कोई काम अधूरा नहीं रहेगा। read more:https://khabarentertainment.in/bjps-assembly-level-seminar-on-ambedkar-jayanti-gave-the-message-of-equality-and-harmony-in-the-society/
*प्रमुख कार्य:*
– *सड़कें:* जिन गलियों में बरसात में पैदल निकलना मुश्किल था, वहां खड़ंजा और सीसी रोड बनवाया।
– *पानी:* हर टोले में इंडिया मार्का हैंडपंप लगवाए, ताकि महिलाओं को दूर न जाना पड़े।
– *आवास:* पात्र गरीबों को सरकारी आवास योजना का लाभ दिलवाया।
– *शिक्षा:* अनाथ और गरीब बच्चों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें, कॉपी, पेन बांटे।
– *राहत:* सर्दी में कंबल, त्योहार पर कपड़े और जरूरतमंद परिवारों को राशन।
गांव के बुजुर्ग रामलखन बताते हैं, “बाबा ने कभी जात-पात नहीं देखी। जिसके घर चूल्हा नहीं जला, वहां सबसे पहले बाबा का भेजा अनाज पहुंचा।”
*3. विरोध भी झेला, पर रुके नहीं*
सेवा की राह आसान नहीं थी। जहां एक तरफ लोग ‘चुन्ना बाबा जिंदाबाद’ के नारे लगा रहे थे, वहीं कुछ लोग पीठ पीछे उनकी कमियां ढूंढकर बदनाम करने में लगे थे। पंचायत की राजनीति में शिकायतें, जांच, आरोप— सब झेला। लेकिन बाबा ने हर आरोप का जवाब अपने काम से दिया। न कोर्ट-कचहरी से डरे, न विरोधियों की साजिशों से कदम पीछे हटाए।read more:https://khabarentertainment.in/panchayat-voter-list-revision-begins-in-saharanpur-election-preparations-gain-momentum/
*4. 2007: गांव से क्षेत्र की जिम्मेदारी*
काम बोलता है। 2007 के पंचायत चुनाव में जनता ने चुन्ना बाबा को ‘प्रमोशन’ दे दिया। गांव की सरपंची से मुक्त कर उन्हें क्षेत्र पंचायत सदस्य चुन लिया गया। अब जिम्मेदारी एक गांव की नहीं, पूरे क्षेत्र की थी।
बाबा ने यहां भी वही फॉर्मूला अपनाया— ‘कम बोलो, ज्यादा काम करो’। क्षेत्र की टूटी सड़कें, स्कूलों की बदहाल छतें, हैंडपंप रिबोर— हर समस्या का निस्तारण प्राथमिकता पर किया। प्रधानों के साथ बैठक कर विकास योजनाओं को जमीन पर उतारा। इसी का नतीजा है कि आज भी क्षेत्र के लोग कहते हैं, _”बाबा जैसा BDC न था, न होगा।”_
*5. अब अगली पीढ़ी: वकील बेटा कल्याणदेव मैदान में*
उम्र के इस पड़ाव पर चुन्ना बाबा अब धीरे-धीरे जिम्मेदारियां कम कर रहे हैं। लेकिन सेवा का ये दीपक बुझेगा नहीं। उनकी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए बेटे कल्याणदेव द्विवेदी ने कमर कस ली है।
पेशे से वकील कल्याणदेव की पहचान एक सरल, मृदुभाषी और कानून के जानकार युवा के रूप में है। कोर्ट से फुर्सत मिलते ही वो पिता के साथ गांव-क्षेत्र में निकल जाते हैं। लोगों की कानूनी मदद, जमीन-मुकदमे के कागज, पेंशन-आवास के फॉर्म— सब निःशुल्क देखते हैं।
युवाओं में कल्याणदेव की ‘साफ छवि’ की चर्चा है। क्षेत्र में कयास लग रहे हैं कि आने वाले पंचायत चुनाव में वो पिता की राजनीतिक विरासत को विधिवत संभाल सकते हैं।
*कल्याणदेव ने कहा:* _”पिताजी ने सेवा का जो रास्ता दिखाया है, उसी पर चलना है। गरीब की लड़ाई कोर्ट में भी लड़ेंगे और सड़क पर भी। बाबा का आशीर्वाद और जनता का प्यार ही मेरी ताकत है।”_
*जनता की जुबानी*
60 वर्षीय विधवा रामदुलारी बताती हैं, _”पति के गुजरने के बाद बाबा ने ही आवास दिलवाया, पेंशन चालू कराई। अब उनका बेटा भी वैसे ही मदद करता है। भगवान दोनों को सलामत रखे
फिलहाल फतेहपुर की सियासी फिजाओं में एक ही चर्चा है— बीहड़ से निकला ये ‘बाबा-बेटा’ का चेहरा आने वाले समय में समाज सेवा की नई इबारत लिखेगा।

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