श्रावण के पहले सोमवार पर चित्रकूट में मानवता की गूंज: बुजुर्गों के आंसू पोछे, आशीर्वाद बटोरे

“नंगे को कपड़ा, भूखे को रोटी: यही है महादेव की असली पूजा” – स्मृतिशेष रमेश चंद्र पाठक “अकिंचन” एवं स्मृतिशेष डॉक्टर सुरेश चंद्र पाठक जन कल्याण समिति, फतेहपुर रोशनाई कानपुर देहात ने रचा इतिहासपहल टुडे हरिकृष्ण कश्यप कानपुर देहात *पवित्र श्रावण मास* के *प्रथम सोमवार* को जब लाखों श्रद्धालु *कामदगिरि परिक्रमा* में सीताराम सीताराम एवं “बम-बम भोले”* का उद्घोष कर रहे थे, उसी *भगवान श्री कामतानाथ जी* के *प्रथम मुखारविंद* के सामने *स्मृतिशेष रमेश चंद्र पाठक “अकिंचन” एवं स्मृतिशेष डॉक्टर सुरेश चंद्र पाठक जन कल्याण समिति, फतेहपुर रोशनाई कानपुर देहात* ने *इंसानियत की ऐसी मिसाल* पेश की कि परिक्रमा पथ पर कदम ठहर गए।
जब नए कपड़े ने धो दिया 5 साल के गम 
समिति की *अध्यक्षा श्रीमती उर्मिला पाठक* पत्नी स्मृतिशेष रमेश चंद्र पाठक “अकिंचन” ने जब एक *80 वर्षीय विधवा माता* को *नई साड़ी* पहनाई, तो वह बिलख पड़ी। कांपते हाथों से साड़ी पकड़कर बोलीं, *”बिटिया, पति के बाद 5 सावन बीत गए। आज लगा कि भोलेनाथ खुद मां का रूप धरकर आए हैं।”* पास ही *कुर्ता-धोती* पाकर एक *बुजुर्ग बाबा* ने समिति के सदस्य *ओउम जी पाठक “अकिंचन”* स्वतंत्र पत्रकार को गले लगा लिया। *सर्व समाज के दर्जनों बुजुर्ग महिलाओं व पुरुषों* को वस्त्र भेंट कर समिति ने *सम्मान की नई परिभाषा* लिख दी।  read more:https://khabarentertainment.in/inner-wheel-club-planted-90-saplings-under-the-a-tree-in-mothers-name-campaign/
*”बुजुर्गों की लाठी बनो, वरना पूजा अधूरी”: उर्मिला पाठक का संदेश*  
*सचिव श्रीमती मिथिलेश पाठक* पत्नी स्मृतिशेष डॉक्टर सुरेश चंद्र पाठक के साथ सेवा करतीं *अध्यक्षा उर्मिला पाठक* ने कहा, *”जिस घर में बुजुर्गों की आंख गीली है, उस घर की आरती भगवान स्वीकार नहीं करते। इनका आशीर्वाद ही असली प्रसाद है। इनकी लाठी बन जाओ तो समझो शिव मिल गए।”* उन्होंने *सर्व समाज* से *बुजुर्गों, दिव्यांगों, गरीबों व असहायों* की मदद का आह्वान किया।
*2023 से चल रही “सेवा की अखंड ज्योति”: ये हैं समिति के 5 महायज्ञ*  *ओउम जी पाठक “अकिंचन”* ने बताया कि *पूज्य बाबा पंडित विद्याधर पाठक “शास्त्री” आयुर्वेदाचार्य* व *दादी सरयू देवी* की प्रेरणा से *2023* में *स्मृतिशेष रमेश चंद्र पाठक “अकिंचन” एवं स्मृतिशेष डॉक्टर सुरेश चंद्र पाठक जन कल्याण समिति, फतेहपुर रोशनाई कानपुर देहात* का गठन हुआ। *माता उर्मिला पाठक* व *चाची मिथिलेश पाठक* के मार्गदर्शन तथा *भाई सुनील पाठक, शिवदेव पाठक, अनुराग पाठक* व *बहन श्रद्धा तिवारी, भांजी भांजा गौरी त्रिपाठी एवं अंस त्रिपाठी, भतीजी भतीजा* के सहयोग से समिति *निस्वार्थ सेवा* कर रही है:
1.  *सर्द रातों के चिराग*: हर साल *500 से अधिक कंबल* व गर्म कपड़े गरीबों-असहायों को समिति के द्वारा सम्मान सहित प्रतिवर्ष भेंट किए जाते हैं,,,,*”हमें वोट नहीं, दुआ चाहिए”: शिवदेव पाठक की हुंकार*  कार्यक्रम में *शिवदेव पाठक* व *सदस्य श्रीमती सपना पाठक* पत्नी शिवदेव पाठक भी मौजूद रहे। *शिवदेव पाठक* ने कहा, *”ताऊ रमेश चंद्र पाठक ‘अकिंचन’ पूर्व ग्राम प्रधान एवं स्मृति शेष डॉक्टर स्वर्गीय सुरेश चंद्र पाठक पिताजी सिखा गए कि गरीब की आह सबसे बड़ी अदालत है। हमारी राजनीति सिर्फ सेवा है। हमें कुर्सी नहीं, बुजुर्गों की दुआ चाहिए।”*
*स्मृतिशेष रमेश चंद्र पाठक “अकिंचन” का सपना हो रहा साकार*  
*स्मृतिशेष रमेश चंद्र पाठक “अकिंचन”* पूर्व ग्राम प्रधान एवं *संस्थापक सदस्य क्षेत्रीय इंटर कॉलेज फतेहपुर रोशनाई कानपुर देहात, एवं स्मृति शेष डॉक्टर सुरेश चंद्र पाठक* का सपना था कि *”गांव का आखिरी आदमी भी सम्मान से जिए”*। आज उनकी पत्नी *उर्मिला पाठक*, *स्मृतिशेष डॉक्टर  सुरेश चंद्र पाठक* की पत्नी मिथिलेश पाठक* व पूरा परिवार अपने बुजुर्गों के स्वप्न को पूरा कर रहा है। *न प्रचार, न राजनीति*, सिर्फ *”नर सेवा नारायण सेवा”* का संकल्प।  *श्रद्धालुओं ने कहा*: *”कांवड़ का जल शिवलिंग पर चढ़ता है, मगर स्मृति शेष रमेश चंद्र पाठक एवं स्मृति शेष सुरेश चंद्र पाठक जन कल्याण समिति फतेहपुर रोशनाई कानपुर देहात ने  तो सेवा रूपी पवित्र जल साक्षात शिवस्वरूप बुजुर्गों पर चढ़ा दिया। यही है चित्रकूट की असली परिक्रमा।”*  *समिति का संकल्प*: *स्मृतिशेष रमेश चंद्र पाठक “अकिंचन” एवं स्मृतिशेष डॉक्टर सुरेश चंद्र पाठक जन कल्याण समिति, फतेहपुर रोशनाई कानपुर देहात* का प्रण है कि *”जब तक एक भी बुजुर्ग निराश्रित, एक भी दिव्यांग लाचार, एक भी बच्चा अनपढ़ रहेगा, तब तक हमारी सेवा यात्रा अनवरत चलती रहेगी। यह पवित्र श्रावण मास  का पहला सोमवार नहीं, सेवा का हर दिन है।इस मौके पर प्रमुख रूप से श्री कामतानाथ प्रथम मुखारविंद के संतो केअलावा सुनील पाठक आदि मौजूद रहे समिति की ओर से प्रातः स्मरणीय पूज्य संत जनों का भी पूजन सम्मान करके उनसे आशीर्वाद लिया गया,,,,

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