कॉपर यौगिक हो सकते है अच्छे जीवाणुरोधी: नितेश जायसवाल

जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) भौतिक विज्ञान अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के रसायन विज्ञान विभाग के डॉ. नितेश जायसवाल ने ओड़ेंस, डेनमार्क में आयोजित 46वें अंतरराष्ट्रीय उपसहसंयोजक रसायन सम्मेलन (ICCC 2026) में अपने शोध कार्य की मौखिक प्रस्तुति दी।read more:https://pahaltoday.com/mission-shakti-team-made-women-and-girls-aware-2/डॉ. जायसवाल ने “मल्टीफंक्शनल शिफ़ बेस मेटल कॉम्प्लेक्स” विषय पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। इस शोध में बहुक्रियाशील शिफ़ बेस धातु समिश्रों के संश्लेषण, उनकी संरचनात्मक एवं स्पेक्ट्रोस्कोपिक विशेषताओं, संगणकीय अध्ययनों तथा जैविक एवं औषधीय अनुप्रयोगों पर प्रकाश डाला गया। डॉ जायसवाल ने बताया कि कॉपर कॉम्प्लेक्स ने विभिन्न रोगजनक जीवाणुओं एवं कवकों के विरुद्ध उल्लेखनीय जीवाणुरोधी तथा कवकरोधी सक्रियता प्रदर्शित की। यह शोध नए एवं प्रभावी धातु-आधारित एंटीबैक्टीरियल एवं एंटिफंगल औषधियों के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण संभावनाएँ प्रस्तुत करता है। इस अध्ययन में धातु समिश्रों की संरचना एवं उनकी जैविक सक्रियता के मध्य संबंध को भी स्पष्ट किया गया, जो भविष्य में औषधीय रसायन के क्षेत्र में उपयोगी सिद्ध हो सकता है। उपरोक्त शोध निष्कर्ष अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका जर्नल ऑफ कोऑर्डिनेशन केमिस्ट्री में प्रकाशित हुआ है।डॉ. जायसवाल की इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) से यात्रा अनुदान प्राप्त हुआ है। यह सम्मेलन उपसहसंयोजक रसायन के क्षेत्र का विश्व के सबसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक आयोजनों में से एक माना जाता है। इस वर्ष आयोजित सम्मेलन में दुनिया के 42 देशों से 1,200 से अधिक वैज्ञानिकों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं एवं उद्योग विशेषज्ञों ने भाग लिया और उपसहसंयोजक रसायन के नवीनतम शोध एवं तकनीकी उपलब्धियों पर विचार-विमर्श किया।सम्मेलन में उपसहसंयोजक रसायन के विभिन्न उभरते एवं अग्रणी शोध क्षेत्रों पर वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए गए। इनमें जैविकी एवं चिकित्सा में उपसहसंयोजक रसायन, उत्प्रेरण एवं बंध सक्रियण, ऊर्जा एवं सतत विकास के लिए उपसहसंयोजक यौगिक, एफ-ब्लॉक तत्वों की रसायन, मुख्य समूह तत्व, इलेक्ट्रॉनिक एवं आणविक संरचना: विधियाँ एवं मॉडलिंग, उपसहसंयोजक रसायन की नई दिशाएँ, तथा सुप्रामॉलिक्यूलर रसायन एवं त्रि-आयामी पदार्थ जैसे अत्याधुनिक विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने शोध निष्कर्ष प्रस्तुत किए और व्यापक वैज्ञानिक चर्चा हुई।

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