सपा-कांग्रेस की दोस्ती पर कन्फ्यूज हैं कांग्रेस नेता नईम सिद्दीकी!

बाराबंकी। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की गठबंधन रणनीति को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। यह लगभग तय है कि विधानसभा चुनाव सपा और कांग्रेस फिर से मिलकर लड़ेंगे। यह भी बात रह-रह कर सामने आ रही है कि कांग्रेस में तमाम नेता और कार्यकर्ता गठबंधन के पक्ष में नहीं हैं। ऐसे समय कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता नईम सिद्दीकी ने उत्तर प्रदेश की राजनीति, सपा-कांग्रेस के संभावित गठबंधन को लेकर सोशल मीडिया पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर लिखा कि मैं व्यक्तिगत रूप से उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के गठबंधन के खिलाफ़ रहा हूँ। क्योंकि जब-जब कांग्रेस पार्टी ने समाजवादी पार्टी से गठबंधन किया है, कांग्रेस कमज़ोर हुई है। 1989 में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी हारी थी, पर उसे 94 विधायक तथा 27.90 प्रतिशत वोट मिले थे। 1989 में कांग्रेस द्वारा समाजवादी राजनीति को दिए गए समर्थन से कांग्रेस को बहुत नुक़सान हुआ और वह नुक़सान निरंतर बढ़ता गया। यहाँ तक कि कांग्रेस पार्टी को 2007 में सबसे कम 8.63 प्रतिशत वोट तथा 22 सीटें मिलीं। उसके बाद उत्तर प्रदेश के नेताओं ने कांग्रेस को मज़बूत करने में बहुत मेहनत की तथा 2012 में कांग्रेस पार्टी ने रालोद के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा। कांग्रेस ने 28 सीटें जीतीं तथा 11.63 प्रतिशत वोट प्राप्त किए। रालोद ने 9 सीटें जीतीं। अगर रालोद के वोट भी जोड़ लिए जाएँ तो कांग्रेस गठबंधन को 13.96 प्रतिशत वोट मिले थे। श्री सिद्दीकी ने बताया कि 2012 के बढ़े हुए वोट प्रतिशत से उत्तर प्रदेश के कांग्रेसियों में बहुत उत्साह था। राहुल गांधी जी के उत्तर प्रदेश में “27 साल यूपी बेहाल” तथा बिजली बिल जैसे मूलभूत मुद्दों ने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने की संभावनाओं को बहुत बढ़ा दिया था।read more:https://pahaltoday.com/mohsina-kidwai-passes-away-an-era-has-come-to-an-end/ पर दुर्भाग्यवश 2017 में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का समझौता हो गया। कांग्रेस को इस समझौते से कितना नुक़सान हुआ, इसका अंदाज़ा लगाना बहुत मुश्किल है, क्योंकि मैं व्यक्तिगत रूप से मानता हूँ कि अगर 2017 में कांग्रेस का समाजवादी पार्टी से समझौता न हुआ होता तो निश्चित रूप से उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनती। जिस चुनाव में कांग्रेसी सरकार बनने का ख़्वाब देख रहे थे, उस 2017 के चुनाव में कांग्रेस को समाजवादी पार्टी के कारण मात्र 6.25ः वोट तथा 7 सीटें मिलीं। उन्होंने कहा कि 2019 के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस से समझौता तोड़कर बहुजन समाज पार्टी के साथ समझौता कर लिया और केंद्र में दूसरी बार भाजपा की सरकार बनने का रास्ता आसान कर दिया। 2022 में कांग्रेस कमज़ोर हो गई थी। कांग्रेस के काफ़ी प्रयासों के बाद भी समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन या समझौता नहीं किया। अति-उत्साह, या यूँ कहें कि 2019 में भाजपा की केंद्र में सरकार बनने में आसानी पैदा करने के इनाम की उम्मीद में, समाजवादी पार्टी ने अकेले चुनाव लड़ा। समाजवादी पार्टी को उम्मीद से बहुत कम सीटें मिलीं और उसकी हार हुई, पर कांग्रेस को भी बहुत नुक़सान हुआ। कांग्रेस को मात्र 2.33 प्रतिशत वोट तथा सिर्फ़ 2 विधानसभा सीटों पर सफलता मिली। राहुल जी के निरंतर प्रयासों, उनकी यात्राओं, सामाजिक न्याय तथा संविधान बचाने जैसे अहम मुद्दों ने कांग्रेस में नई जान डाल दी। समाजवादी पार्टी, जो कांग्रेस के बग़ैर तीसरे मोर्चे की वकालत कर रही थी, कांग्रेस और राहुल जी की बढ़ी लोकप्रियता को देखकर कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल हो गई। राहुल जी की मेहनत और उनके संघर्ष का सबसे अधिक लाभ समाजवादी पार्टी को मिला, जो उत्तर प्रदेश में 37 सीटें जीतने में कामयाब हुई। मुझे समाजवादी पार्टी के नेताओं का इस जीत में राहुल गांधी जी को श्रेय न देना बहुत तकलीफ़ देता है। श्री सिद्दीकी ने कहा कि उत्तर प्रदेश 2027 विधानसभा चुनाव के लिए हालाँकि बहुत देर हो चुकी है, पर जिस तरह से समाजवादी पार्टी के नेता कांग्रेस को कमतर बताने का प्रयास कर रहे हैं, उससे मुझे लगता है कि कांग्रेस को समाजवादी पार्टी के अलावा अन्य विकल्पों पर काम करना चाहिए और भविष्य में समाजवादी पार्टी से प्री-पोल अलायंस नहीं करना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *