प्रतिबंधित मशीनें खोल रहीं प्रशासनिक सख्ती के दावों की पोल

सोनभद्र। ओबरा तहसील क्षेत्र के खेवंधा गांव स्थित रेणु नदी इन दिनों अवैध बालू खनन का अड्डा बन चुकी है। यहां लीज की आड़ में खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, बावजूद इसके जिम्मेदार विभागों के अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं। नवागत जिलाधिकारी चर्चित गौड़ के आने के बाद भी रेणु नदी से बालू के अवैध खनन का गोरखधंधा रूकने का नाम नहीं ले रहा है।read more:https://pahaltoday.com/kamalganj-outrage-erupts-against-smart-meters-consumers-warn-of-agitation/
गुरूवार को भी जलीय जीव जंतुओं को दर किनार कर नदी के गर्भ से प्रतिबंधित लिफ्टिंग मशीनों के जरिए छान कर बालू की निकासी कराए जाए का काला कारोबार बदस्तूर जारी रहा। जबकि उत्तर प्रदेश उपखनिज परिहार नियमावली के नियम 42 (ज) के तहत नदी में लिफ्टिंग मशीनों का प्रयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है, इसके बावजूद मशीनों के जरिए बड़े पैमाने पर बालू की निकासी खुलेआम करायी जा रही है। रोक के बावजूद चल रहीं प्रतिबंधित मशीनें प्रशासनिक सख्ती के दावों की पोल खोल रहीं हैं। सूत्रों के मुताबिक, ओमैक्स मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से अराजी संख्या 246 (खंड ‘स’) में लगभग सात हेक्टेयर क्षेत्र में खनन पट्टा आवंटित है। आरोप है कि इसी लीज की आड़ में निर्धारित क्षेत्र से बाहर जाकर और नियमों को ताक पर रखकर अवैध खनन को अंजाम दिया जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि एसडीएम, वन विभाग और स्थानीय पुलिस की मौजूदगी के बावजूद यह खेल बदस्तूर जारी है। दिन-रात हो रहे इस अवैध खनन से जहां सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है, वहीं पर्यावरण संतुलन भी गंभीर खतरे में पड़ गया है। नदी की धारा से छेड़छाड़ भविष्य में बड़े जल संकट और प्राकृतिक आपदा को न्योता दे सकती है। सूत्रों ने बताया कि रेणु नदी में चल रहे नियम विरूद्ध बालू खनन को लेकर कई बार शिकायतें की जा चुकी है, बावजूद इसके जिम्मेदार अधिकारियों ने ठोस कार्रवाई नहीं की, जिससे खनन कर्ताओं के हौसले बुलंद हैं। जिले में नवागत जिलाधिकारी चर्चित गौड़ के आने के बाद लोगों की उम्मीदें उनपर टीकी है। क्या नवागत डीएम इस अवैध खनन पर लगाम लगा पाएंगे या फिर पूर्व की तरह लीज की आड़ में नियम विरूद्ध बालू का खनन जारी रहेगा, यह प्रश्न इन दिनों क्षेत्रवासियों में खूब चर्चा का विषय बना हुआ है। उधर इस बावत नवागत जिलाधिकारी के सीयूजी नंबर पर काल कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन वार्ता नहीं हो सकी। लिहाजा उनका पक्ष नहीं लिया जा सका।

 

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