अमेठी। जनपद में ग्राम पंचायतों के स्तर पर लाखों रुपये की लागत से बनाए गए अमृत सरोवर आज बदहाली का शिकार होकर सूखे पड़े हैं। भीषण गर्मी में जहां इन सरोवरों से पशु-पक्षियों और ग्रामीणों को राहत मिलनी चाहिए थी, वहीं अधिकांश सरोवरों में पानी नदारद है। हालात यह हैं कि कई स्थानों पर सरोवर केवल गड्ढे बनकर रह गए हैं और उनमें घास-फूस उग आई है।read more:https://worldtrustednews.in/dlsa-secretary-nupur-srivastava-conducted-a-surprise-inspection-of-the-prison-legal-clinic-and-the-district-jail/ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के समय मानकों की अनदेखी की गई और रखरखाव की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई। बृजेश मिश्र, विजेन्द्र सिंह लोहा, राकेश तिवारी, अजय सिंह, पंडित घनश्याम तिवारी, ओमप्रकाश यादव, अशोक यादव, नीटू सिंह, चंद्रभान तिवारी सहित सैकड़ों लोगों ने बताया कि अमृत सरोवर योजना का उद्देश्य जल संरक्षण और पशुओं को पानी उपलब्ध कराना था, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों और ग्राम पंचायतों की लापरवाही के चलते यह योजना फेल होती नजर आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कई सरोवरों में पानी भरने की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई, जिससे गर्मी बढ़ते ही ये पूरी तरह सूख जाते हैं। वहीं कुछ स्थानों पर निर्माण कार्य में अनियमितताओं की भी शिकायतें सामने आ रही हैं। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए सरोवरों को पुनर्जीवित किया जाए, ताकि योजना का लाभ आम जनता और पशुओं को मिल सके।