कागजों में कार्रवाई, जमीन पर झुका पोल! मोहम्मदपुर उपकेंद्र के JE और SDO की कार्यशैली पर उठे सवाल, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

आजमगढ़।मोहम्मदपुर विद्युत उपकेंद्र एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला केवल बिजली कटौती का नहीं, बल्कि विभागीय दावों और जमीनी हकीकत के बीच दिख रहे अंतर का है। विभाग की ओर से जारी पत्र में संबंधित 11 हजार वोल्ट लाइन पर कार्रवाई किए जाने का उल्लेख किया गया है, लेकिन क्षेत्र से सामने आई जीपीएस कैमरा युक्त तस्वीरों में संबंधित पोल अब भी झुका हुआ दिखाई दे रहा है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर लोगों ने सवालों की बौछार शुरू कर दी है। मोहम्मदपुर उपकेंद्र के अंतर्गत आने वाले कई गांवों के लोगों का कहना है कि पिछले सात से आठ महीनों से झुके हुए पोल, जर्जर तार, लटकती एलटी लाइन, ट्रिपिंग और अनियमित बिजली आपूर्ति की शिकायतें लगातार स्थानीय JE और SDO को दी जा रही हैं। शिकायतें टोल फ्री नंबर, सोशल मीडिया, जनसुनवाई पोर्टल और विभागीय अधिकारियों तक पहुंचाई गईं। ग्रामीणों का कहना है कि हर बार एक जैसा जवाब मिला। “शिकायत दर्ज कर ली गई है।”read more:https://khabarentertainment.in/relief-rain-falls-from-the-sky-in-bhadohi-the-carpet-city/“संबंधित अधिकारी को भेज दी गई है।””जल्द समस्या का समाधान कर दिया जाएगा।”लेकिन लोगों का आरोप है कि मौके पर स्थिति में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं देता। अब विभागीय पत्र और जीपीएस फोटो सामने आने के बाद लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि यदि कार्य पूरा हो चुका है तो झुका हुआ पोल अब भी क्यों दिखाई दे रहा है।सोशल मीडिया पर लोग खुलकर लिख रहे हैं कि क्या केवल फाइलों में कार्रवाई पूरी हो रही है। क्या निरीक्षण रिपोर्ट और वास्तविक स्थिति में अंतर है। क्या शिकायतों का निस्तारण केवल ऑनलाइन पोर्टल तक सीमित रह गया है।ग्रामीणों का कहना है कि मोहम्मदपुर उपकेंद्र के अंतर्गत मखदुमपुर, मंगरावा, वजीरमलपुर, खालिसपुर, कोइलाडीह, मुजफ्फरपुर, बिंद्रा बाजार, दयालपुर, रानीपुर रजमों, फरिहा और अबूसैदपुर सहित कई गांवों में आज भी जर्जर पोल, टूटे इंसुलेटर और खतरनाक बिजली लाइनें लोगों की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी शिकायत का निस्तारण दिखाया जाता है तो उसका भौतिक सत्यापन भी सार्वजनिक होना चाहिए। किस दिन कौन सा पोल बदला गया। किस अधिकारी ने निरीक्षण किया। कौन सा कार्य पूरा हुआ। इसकी जानकारी भी जनता के सामने आनी चाहिए।ग्रामीणों ने मांग की है कि मोहम्मदपुर विद्युत उपकेंद्र के JE और SDO के स्तर पर प्राप्त शिकायतों, किए गए निरीक्षणों और निस्तारित मामलों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही, गलत रिपोर्टिंग या शिकायतों के निस्तारण में कमी पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए नियमानुसार कार्रवाई की जाए।क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि बिजली विभाग की पहली जिम्मेदारी लोगों की सुरक्षा है। जनता अब केवल ऑनलाइन जवाब नहीं, बल्कि गांवों में दिखाई देने वाला स्थायी समाधान चाहती है। उनका कहना है कि झुके हुए पोल और जर्जर तार किसी भी दिन बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। इसलिए कार्रवाई हादसे के बाद नहीं, उससे पहले होनी चाहिए।

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