कोलकाता . विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने आरोप लगाया कि कई परीक्षा केंद्रों पर नीट यूजी परीक्षा देने पहुंचे हिंदू अभ्यर्थियों को ‘कलावा’ और ‘माला’ जैसे धार्मिक प्रतीक पहनने की अनुमति नहीं दी गई, जबकि मुस्लिम छात्राओं को हिजाब और बुर्का पहनकर परीक्षा देने की इजाजत दी गई। संगठन ने इस कथित भेदभाव की जांच की मांग की है। वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने आरोप लगाया कि अभ्यर्थियों के साथ अलग-अलग व्यवहार सांप्रदायिक भेदभाव की श्रेणी में आता है। उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) से इस मामले की जांच कराने की मांग की। बंसल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, ”परीक्षा के सफल आयोजन के लिए हम एनटीए को बधाई देते हैं, लेकिन उसे यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या हिंदू छात्रों के कलावे और सामान्य मालाओं पर प्रतिबंध लगाया गया, जबकि मुस्लिम छात्राओं को हिजाब और बुर्का पहनने की अनुमति दी गई।”read more:https://pahaltoday.com/co-gave-instructions-for-action-against-anarchists-and-drug-addicts/उन्होंने परीक्षा केंद्रों पर लागू ड्रेस कोड संबंधी नियमों पर भी एनटीए से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा।पेपर लीक के कारण मूल परीक्षा रद्द किए जाने के बाद रविवार को आयोजित नीट की दोबारा परीक्षा में 20 लाख से अधिक मेडिकल अभ्यर्थी शामिल हुए। एनटीए ने एक बयान में कहा कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा भारत में 5,440 और विदेश में 14 केंद्रों पर आयोजित की गई। परीक्षा हिंदी और अंग्रेजी सहित 13 भाषाओं में कराई गई।