बहराइच ( मिहीपुरवा )lकतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के ककराहा रेंज अंतर्गत ग्राम पंचायत गोपिया के रामसहाय पुरवा गांव में वन विभाग की टीम को बड़ी सफलता मिली है। लगातार तेंदुए की चहलकदमी से ग्रामीणों में बने भय के माहौल के बीच सोमवार 31 अगस्त की सुबह करीब 5:30 बजे वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे में एक व्यस्क मादा तेंदुआ सुरक्षित रूप से कैद हो गई।ग्रामीणों के अनुसार, पिछले कई दिनों से गांव और आसपास के क्षेत्रों में तेंदुए की लगातार आवाजाही देखी जा रही थी। गत 20 अगस्त को तेंदुए ने एक गाय की बछिया का शिकार भी किया था। इसके बाद सुबह की गश्त के दौरान तेंदुए के लगातार पगमार्क मिलने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल था। ग्रामीणों ने वन विभाग को मौखिक एवं लिखित रूप से इसकी सूचना दी थी।मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका को देखते हुए आवश्यक अनुमति प्राप्त करने के बाद वन विभाग ने 26 अगस्त को गांव में रणनीतिक स्थान पर पिंजरा लगाया था। सोमवार सुबह तेंदुआ बिना किसी चोट के पिंजरे में कैद हो गया। इसके बाद वन विभाग की टीम ने उसे सुरक्षित स्थान (सेफ हाउस) पहुंचाया।वन विभाग के अनुसार, पकड़ी गई मादा तेंदुए की उम्र करीब 9 से 10 वर्ष है।read more:https://pahaltoday.com/villagers-upset-over-garbage-dumping-staged-a-protest-at-the-district-collectorate/पशु चिकित्सक द्वारा किए गए स्वास्थ्य परीक्षण में तेंदुआ स्वस्थ और सक्रिय पाया गया। चिकित्सकीय जांच में उसे परिवहन तथा प्राकृतिक आवास में छोड़े जाने के लिए फिट बताया गया है। अब राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) एवं विभाग की निर्धारित एसओपी के अनुसार तेंदुए को सुरक्षित प्राकृतिक आवास में मुक्त करने की प्रक्रिया की जा रही है।डीएफओ अपूर्व दीक्षित ने ग्रामीणों से अपील की है कि तेंदुआ दिखे तो भीड़ न लगाएं, वन विभाग को दें सूचना मानसून के दौरान ग्रामीणों को विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। घनी झाड़ियों और बढ़ी हुई घास में वन्यजीव आसानी से छिप सकते हैं। ग्रामीणों से कहा गया है कि खेतों अथवा सुनसान रास्तों पर अकेले न जाएं और संभव हो तो 3-4 लोगों के समूह में लाठी-डंडे के साथ आवाज करते हुए निकलें। सुबह अंधेरा रहते तथा देर शाम या रात में खेतों की ओर जाने से बचें।छोटे बच्चों को भी सुबह-सुबह और देर शाम घर के बाहर अकेले न छोड़ें। घरों और बाड़ों के आसपास उगी झाड़ियों की नियमित सफाई रखें। तेंदुआ अथवा कोई अन्य वन्यजीव दिखाई देने पर घबराने, हमला करने या भीड़ जुटाने के बजाय तत्काल वन विभाग को सूचना दें।