स्योहारा । थाना क्षेत्र के ग्राम रामपुर किशना के जंगल स्थित प्राचीन मंदिर में चंदे की राशि और अधूरे निर्माण कार्य को लेकर विवाद गहरा गया है। ग्रामीणों ने मंदिर में एकत्रित हुए लाखों रुपये के चंदे का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग करते हुए पुजारी नागा बाबा केसरी दास पर धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। वहीं पुजारी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे उन्हें मंदिर से हटाने की साजिश बताया है।ग्रामीणों के अनुसार करीब सात वर्ष पूर्व स्योहारा निवासी धर्मेंद्र सिंह त्यागी ने मंदिर के लिए 14 बीघा भूमि दान में दी थी। इसके बाद मंदिर के विस्तार और भव्य निर्माण की योजना बनाई गई। मंदिर में वर्ष में दो बार कथा एवं विशाल भंडारे का आयोजन होता है, जिसमें आसपास के अनेक गांवों से श्रद्धालु श्रद्धापूर्वक चंदा देते हैं।ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले कई वर्षों में मंदिर में लगभग 10 लाख रुपये का चंदा एकत्र हुआ, लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। मंदिर परिसर में सीमेंट, सरिया, बदरपुर और अन्य निर्माण सामग्री लंबे समय से खुले में पड़ी होने के कारण खराब हो रही है।ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार पुजारी से आय-व्यय का विवरण मांगा, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। उनका आरोप है कि मंदिर निर्माण के बजाय चंदे की राशि का उपयोग अन्य कार्यों में किया गया। कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि चंदे के पैसों से पुजारी के लिए इलेक्ट्रिक स्कूटी और एक पुरानी बोलेरो वाहन खरीदी गई।मामले को लेकर गांव में तनाव का माहौल है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मंदिर के चंदे की निष्पक्ष जांच कराने, आय-व्यय का सार्वजनिक लेखा-जोखा प्रस्तुत कराने तथा अधूरे निर्माण कार्य को शीघ्र पूरा कराने की मांग की है।
उधर, मंदिर के पुजारी नागा बाबा केसरी दास ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि वह वर्ष 2006 से मंदिर की सेवा कर रहे हैं। उनके आने के समय यहां केवल एक छोटा शिव मंदिर था, जबकि अब राम दरबार, सत्संग भवन सहित कई धार्मिक निर्माण कराए जा चुके हैं। उनका कहना है कि कुछ लोग उन्हें मंदिर से हटाकर अपनी पसंद का पुजारी बैठाना चाहते हैं, इसलिए उनके विरुद्ध झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं।read more:https://pahaltoday.com/villagers-upset-over-garbage-dumping-staged-a-protest-at-the-district-collectorate/
ग्रामीणों का पक्ष
“मंदिर का चंदा मंदिर के विकास पर ही खर्च होना चाहिए। वर्षों से हिसाब नहीं दिया गया है। निर्माण अधूरा पड़ा है और सामग्री खराब हो रही है। हमारी मांग केवल आय-व्यय का पारदर्शी हिसाब और निर्माण कार्य पूरा कराने की है।”— परम सिंह, राजू, शीशपाल सिंह, रामअवतार सिंह एवं अन्य ग्रामीणपुजारी का पक्ष”मैं वर्ष 2006 से मंदिर की सेवा कर रहा हूं। मेरे कार्यकाल में मंदिर का लगातार विकास हुआ है। मुझ पर लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं। कुछ लोग निजी स्वार्थवश मुझे यहां से हटाना चाहते हैं, इसलिए इस प्रकार का विवाद खड़ा किया जा रहा है।”
— नागा बाबा केसरी दास, मंदिर पुजारी