गाजीपुर। जनपद में मातृ मृत्यु दर को कम करने और प्रत्येक गर्भवती महिला को सुरक्षित मातृत्व उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) मोहम्मदाबाद में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आशीष राय की अध्यक्षता में समीक्षा एवं कार्ययोजना बैठक आयोजित की गई। बैठक में सीएचसी क्षेत्र की सभी एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। इस दौरान गर्भावस्था से लेकर प्रसव और प्रसवोत्तर देखभाल तक स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने पर विस्तृत मंथन किया गया।ठक में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आशीष राय ने कहा कि मातृ मृत्यु की प्रत्येक घटना केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है। इसलिए हर मामले की गहन समीक्षा कर उसके वास्तविक कारणों का पता लगाया जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी रणनीति अपनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि सीएचसी में प्रसव के बाद भर्ती महिलाओं एवं उनके परिजनों को प्रेरणा कैंटीन के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण भोजन और जलपान की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।read more:https://khabarentertainment.in/prof-dr-rajendra-rajput-receives-guru-shree-2026-award-at-national-level-brings-honour-to-ghazipur/…………….बैठक में गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीकरण, नियमित प्रसव पूर्व जांच (एएनसी), उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों की समय रहते पहचान एवं विशेष निगरानी, सभी प्रसव संस्थागत स्तर पर कराने, प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं की शीघ्र पहचान और उपचार, आवश्यकता पड़ने पर उच्च स्तरीय अस्पताल में त्वरित रेफरल तथा 102 और 108 एम्बुलेंस सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई।स्वास्थ्य विभाग ने आशा, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी विशेष जोर दिया। साथ ही प्रत्येक मातृ मृत्यु की गोपनीय समीक्षा (मैटरनल डेथ रिव्यू) कर वास्तविक कारणों का विश्लेषण करने और भविष्य के लिए सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए गए। बैठक में जननी सुरक्षा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान जैसी योजनाओं का लाभ पात्र महिलाओं तक शत-प्रतिशत पहुंचाने के लिए भी कार्ययोजना तैयार की गई।कित्सा अधीक्षक ने निर्देश दिया कि जिन गर्भवती महिलाओं में एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह अथवा अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हों, उन्हें विशेष निगरानी में रखा जाए। स्वास्थ्य केंद्रों पर आवश्यक दवाओं, प्रशिक्षित चिकित्सकों, स्टाफ, रक्त की उपलब्धता और आपातकालीन प्रसूति सेवाओं को हर समय तैयार रखने के निर्देश भी दिए गए।बैठक के अंत में स्वास्थ्य कर्मियों से अपील की गई कि वे प्रत्येक गर्भवती महिला तक सुरक्षित मातृत्व का संदेश पहुंचाएं। समय पर स्वास्थ्य जांच, संतुलित पोषण, नियमित चिकित्सकीय परामर्श और संस्थागत प्रसव अपनाकर अधिकांश मातृ मृत्यु की घटनाओं को रोका जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने इसे केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि “सुरक्षित परिवार और सशक्त समाज” की दिशा में एक महत्वपूर्ण जनस्वास्थ्य अभियान बताया