वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत समेत करीब 60 व्यापारिक सहयोगी देशों पर नए टैरिफ लागू करने का ऐलान कर दिया है। नए नियमों के तहत भारत को 10 प्रतिशत टैरिफ वाली श्रेणी में रखा गया है। यह शुल्क शुक्रवार रात 12.01 बजे (ईस्टर्न टाइम) से प्रभावी हो गया। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह कदम उन देशों के उत्पादों पर नियंत्रण के लिए उठाया गया है, जिनके निर्यात में कथित तौर पर जबरन मजदूरी का इस्तेमाल होता है। read more:https://worldtrustednews.in/yogi-government-makes-extensive-preparations-for-uninterrupted-power-supply-during-kanwar-yatra-uppcl-gears-up/अमेरिका ने इससे पहले लागू किए गए अतिरिक्त टैरिफ की समयसीमा खत्म होने के बाद नई व्यवस्था लागू की है।नए टैरिफ का असर भारत, चीन और यूरोपीय संघ समेत अमेरिका के कई बड़े व्यापारिक साझेदारों पर पड़ने की संभावना है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह नीति व्यापार में निष्पक्षता लाने और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करने के उद्देश्य से बनाई गई है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के अधिकारियों के मुताबिक, जबरन मजदूरी को लेकर टैरिफ लगाने की नीति अमेरिका में लंबे समय से मौजूद है। नया शुल्क इस साल की शुरुआत में लगाए गए 10 प्रतिशत के वैश्विक टैरिफ की जगह लेगा। ट्रंप प्रशासन ने दावा किया है कि नए टैरिफ की तैयारी में करीब एक महीने तक काम किया गया है और इसे कानूनी रूप से मजबूत आधार के साथ लागू किया गया है।इस नई व्यवस्था में भारत को उन 17 देशों के समूह में रखा गया है, जिन पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगेगा। वहीं चीन और जापान समेत कई देशों पर 12.5 प्रतिशत तक शुल्क लगाया गया है। कुछ ऐसे क्षेत्र भी हैं, जहां पहले से ही अधिक टैरिफ लागू हैं, इसलिए वहां इस नए शुल्क का अतिरिक्त प्रभाव नहीं पड़ेगा। अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते के तहत कुछ उत्पादों को राहत दी गई है।रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआत में भारत पर भी अधिक टैरिफ लगाने की योजना थी, लेकिन बाद में अमेरिका ने भारत में जबरन मजदूरी से जुड़े मामलों में सुधार का हवाला देते हुए शुल्क दर कम रखी। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि जिन देशों ने श्रम नियमों को मजबूत किया है, उनके साथ व्यापारिक संबंध बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा। टैरिफ को लेकर ट्रंप प्रशासन को पहले कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था, लेकिन इसके बावजूद सरकार ने नई व्यवस्था लागू कर दी है। अब नए शुल्कों का असर दोनों देशों के बीच व्यापार, निर्यात लागत और कंपनियों की रणनीतियों पर पड़ने की संभावना है। भारत के लिए यह कदम खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अमेरिका उसके सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में शामिल है।