जकार्ता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा का दूसरा दिन भारत-इंडोनेशिया संबंधों के इतिहास में एक नया मील का पत्थर साबित होने जा रहा है आज का दिन राजनीतिक, रणनीतिक और जनसंपर्क (पीपुल-टू-पीपुल कनेक्ट) तीनों ही लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है, जो दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा। आज दिन की शुरुआत राष्ट्रपति प्रबोवो सुबिआंतो और प्रधानमंत्री मोदी के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की द्विपक्षीय वार्ता से होगी। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र में बदलते समीकरणों के बीच दोनों देशों की यह मुलाकात बेहद अहम है। इस बैठक में मुख्य रूप से इन मुद्दों पर चर्चा होनी है जिसमें रक्षा और समुद्री सुरक्षा में सहयोग को बढ़ाना, व्यापार-निवेश और डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के साथ ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए साझा कदम उठाना है। read more:https://pahaltoday.com/star-hospital-is-proving-to-be-a-boon-for-poor-and-helpless-patients/द्विपक्षीय वार्ता के बाद प्रधानमंत्री मोदी इंडोनेशिया की संसद ‘कोम्प्लेक्स पार्लेमेन रिपब्लिक इंडोनेशिया’ पहुंचेंगे। वहां वे सांसदों को एक विशेष कार्यक्रम के तहत संबोधित करेंगे। पीएम मोदी का यह संबोधन भारत-इंडोनेशिया की लोकतांत्रिक साझेदारी के साथ-साथ दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों को एक नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। संसद का यह संबोधन दोनों देशों के बीच केवल सरकारी स्तर पर ही नहीं, बल्कि विधायी और लोकतांत्रिक स्तर पर भी संबंधों को मजबूत करेगा। प्रवासी भारतीयों से संवाद दिन के अंतिम पड़ाव में प्रधानमंत्री मोदी जकार्ता में भारतीय समुदाय के एक बड़े कार्यक्रम में शामिल होंगे। अपने इस संबोधन में प्रधानमंत्री भारत की तेज विकास यात्रा और वैश्विक मंच पर देश की बढ़ती धाक का जिक्र करेंगे। साथ ही, वे भारत-इंडोनेशिया के सदियों पुराने सांस्कृतिक और जन-जन के रिश्तों को और प्रगाढ़ करने पर जोर देंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री की इस यात्रा से न केवल दोनों देशों के कूटनीतिक संबंध मजबूत होंगे, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में भारत की एक्ट ईस्ट नीति को एक नई गति मिलेगी।