आजमगढ़।मोहम्मदपुर विद्युत उपकेंद्र की बदहाल बिजली व्यवस्था अब क्षेत्र के हजारों उपभोक्ताओं के लिए गंभीर जनसमस्या बन चुकी है। लगातार बिजली कटौती, रात भर अंधेरा, बार बार ट्रिपिंग, लो वोल्टेज, जर्जर तार, झुके हुए विद्युत पोल, ओवरलोड ट्रांसफार्मर और अनियमित आपूर्ति से लोग परेशान हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि शिकायतों का सिलसिला लगातार जारी है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थायी समाधान अब तक क्यों नहीं दिखाई दे रहा।मोहम्मदपुर विद्युत उपकेंद्र के अंतर्गत आने वाले मंगरावा, मखदुमपुर, वजीरमलपुर, खालिसपुर, कोइलाडीह, मुजफ्फरपुर, बिंद्रा बाजार, रानीपुर रजमों, दयालपुर, मोहम्मदपुर, फरिहा, अबूसैदपुर सहित दर्जनों गांवों के लोगों का कहना है कि पिछले कई महीनों से लगातार शिकायतें की जा रही हैं। विभाग के टोल फ्री नंबर, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, एक्स, जनसुनवाई पोर्टल और स्थानीय अधिकारियों तक समस्याएं पहुंचाई जा रही हैं, लेकिन बिजली व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।ग्रामीणों का कहना है कि सोशल मीडिया पर शिकायत करते ही कुछ मिनटों में एक जैसा जवाब मिल जाता है।read more:https://pahaltoday.com/pm-modi-calls-for-women-empowerment-calls-women-reservation-a-historic-opportunity/
“आपकी शिकायत दर्ज कर ली गई है।”
“संबंधित अधिकारी को भेज दी गई है।”
“शीघ्र समस्या का समाधान कर दिया जाएगा।”
लोगों का कहना है कि पिछले लगभग दो महीनों से यही संदेश बार बार मिल रहा है। लेकिन यदि वास्तव में कार्रवाई हो रही है तो उसका परिणाम गांवों में क्यों नहीं दिखाई दे रहा। लोगों का सवाल है कि आखिर शिकायतों पर काम फाइलों में हो रहा है या जमीन पर?क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि स्थानीय स्तर पर JE और SDO को भी अनेक बार मौखिक और लिखित शिकायतें दी गईं। कई स्थानों पर निरीक्षण और जल्द समाधान का आश्वासन भी मिला, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि आज भी जर्जर पोल वैसे ही खड़े हैं, नीचे लटकते तार वैसे ही जानलेवा बने हुए हैं, ट्रिपिंग पहले की तरह जारी है और रात की बिजली व्यवस्था पूरी तरह अव्यवस्थित बनी हुई है।लोगों का कहना है कि शाम होते ही बिजली की आंख मिचौली शुरू हो जाती है। कई बार पूरी पूरी रात बिजली नहीं रहती। यदि आती भी है तो कुछ मिनटों बाद फिर चली जाती है। बिजली आने और जाने का कोई निर्धारित समय नहीं है। इससे किसानों, मजदूरों, व्यापारियों, छात्रों और आम उपभोक्ताओं की दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है।किसानों का कहना है कि धान की रोपाई और सिंचाई का समय चल रहा है। कई किसान और मजदूर अपनी मजदूरी छोड़कर पूरी रात खेतों पर बिजली का इंतजार करते हैं, लेकिन सुबह तक बिजली नहीं आती। इससे उनकी आय भी प्रभावित होती है और फसल भी समय पर पानी नहीं मिलने से नुकसान झेलती है।ग्रामीणों का कहना है कि यदि विभाग ओवरलोडिंग को ही समस्या बता रहा है तो यह भी सार्वजनिक किया जाए कि ओवरलोडिंग दूर करने के लिए पिछले वर्षों में क्या कार्य किए गए। कितने नए ट्रांसफार्मर लगाए गए। कितने फीडरों की क्षमता बढ़ाई गई। कितने जर्जर पोल बदले गए। कितने किलोमीटर पुराने तार बदले गए। यदि यह कार्य हुए हैं तो उनका विवरण सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा।लोगों ने यह भी मांग उठाई है कि सोशल मीडिया पर जिन शिकायतों को “निस्तारित” बताया जाता है, उनकी सूची सार्वजनिक की जाए। प्रत्येक शिकायत के साथ यह भी बताया जाए कि किस गांव में क्या काम हुआ, किस अधिकारी ने निरीक्षण किया, किस दिन कार्य पूरा हुआ और उसका प्रमाण क्या है। इससे उपभोक्ताओं का विश्वास भी बढ़ेगा और व्यवस्था में पारदर्शिता भी आएगी।ग्रामीणों का कहना है कि बिजली विभाग की कार्यशैली पर इसलिए सवाल उठ रहे हैं क्योंकि शिकायतों के जवाब तेजी से मिलते हैं, लेकिन समस्याओं का समाधान उसी गति से दिखाई नहीं देता। लोगों का कहना है कि अब उन्हें कॉपी पेस्ट संदेश नहीं चाहिए। उन्हें गांवों में बदले हुए पोल, नई लाइनें, कम ट्रिपिंग और नियमित बिजली चाहिए।क्षेत्रीय लोगों ने मुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक और उच्च अधिकारियों से मांग की है कि मोहम्मदपुर विद्युत उपकेंद्र की कार्यप्रणाली, लंबित शिकायतों और रखरखाव कार्यों की स्वतंत्र जांच कराई जाए। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय कर आवश्यक कार्रवाई की जाए तथा बिजली व्यवस्था को समयबद्ध तरीके से दुरुस्त किया जाए।क्षेत्र की जनता का कहना है कि बिजली केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि खेती, रोजगार, व्यापार, शिक्षा और जीवन का आधार है। इसलिए अब आश्वासनों से आगे बढ़कर ऐसा समाधान चाहिए जो कागजों और सोशल मीडिया पर नहीं, बल्कि गांवों की गलियों, खेतों और घरों में दिखाई दे।