गांव से मायके और दूसरे जिले तक यू-विन ने जोड़ी स्वास्थ्य सेवाओं की कड़ी

बहराइच l जनपद में बच्चों और गर्भवती महिलाओं तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। स्वास्थ्य विभाग के पास आशा और एएनएम का मजबूत नेटवर्क होने के बावजूद एक समस्या हमेशा बनी रहती थी, जब कोई गर्भवती महिला प्रसव के लिए अपने मायके चली जाती थी या कोई परिवार रोजगार के सिलसिले में दूसरे जिले में चला जाता था, तो उसकी जानकारी स्वास्थ्य तंत्र से छूट जाती थी। लेकिन अब यू-विन पोर्टल ने इस खाई को पाटकर डिजिटल सुरक्षा कवच तैयार कर दिया है।65 हजार से अधिक नवजात डिजिटल नेटवर्क से जुड़े-यू-विन पोर्टल के माध्यम से जनपद में लाभार्थियों की डिजिटल ट्रैकिंग को बेहद मजबूत किया गया है। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ एसके सिंह के अनुसार जनपद में अब तक 44,945 नई गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण और 13,593 महिलाओं को पोर्टल पर टैग किया जा चुका है। इसके साथ ही, पोर्टल पर दर्ज 70,034 प्रसव परिणामों के माध्यम से 65,991 नवजात शिशुओं को सीधे इस डिजिटल नेटवर्क से जोड़ा गया है, जिससे उनके नियमित टीकाकरण की राह आसान हो गई है।read more:https://pahaltoday.com/the-essence-of-prasad-is-to-receive-the-blessings-of-the-deity-to-whom-it-is-offered/उन्होंने बताया कि पहले एएनएम को नई गर्भवतियों की जानकारी के लिए केवल आशा कार्यकर्ताओं पर निर्भर रहना पड़ता था। अब यू-विन पोर्टल के कारण यदि कोई लाभार्थी दूसरे जिले या शहर के अस्पताल में भी पहुंचता है, तो उसका डिजिटल रिकॉर्ड पूरे देश के स्वास्थ्य तंत्र में उपलब्ध हो जाता है।365 सब-सेंटर और 3,321 आशा कार्यकर्ताओं का नेटवर्क-इस व्यवस्था को धरातल पर उतारने के लिए जनपद में 365 उप-स्वास्थ्य केंद्रों  को पोर्टल पर सृजित किया गया है। साथ ही ग्रामीण इलाकों में त्वरित ट्रैकिंग के लिए 3,321 आशा कार्यकर्ताओं को पोर्टल पर टैग किया गया है।यू-विन के आने से स्वास्थ्य कर्मियों का बोझ भी कम हुआ है। पहले टीकाकरण की ड्यू-लिस्ट (बचे हुए लाभार्थियों की सूची) हाथ से बनाने में काफी समय लगता था, जो अब स्वतः तैयार हो जाती है। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब आशा, आंगनबाड़ी और एएनएम तीनों की ड्यू-लिस्ट एक समान रहती है, जिससे उनका आपसी तालमेल बेहतर हुआ है।*सरकारी संदेशों पर बढ़ा भरोसा-*टीकाकरण की तिथि और स्थान की जानकारी सीधे मोबाइल पर एसएमएस के जरिए पहुंच रही है। एएनएम कल्पना द्विवेदी के अनुसार, डिजिटल संदेशों से फॉलो-अप आसान हुआ है। सोशल मीडिया के इस दौर में भी लोग सरकारी संदेशों को बेहद भरोसेमंद मानते हैं। यदावपुर मटेहिया के विश्वनाथ प्रताप सिंह ने बताया कि वे मोबाइल पर मैसेज देखकर ही अपनी पत्नी की जांच कराने स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे हैं।सीएमओ डॉ. संजय कुमार कहते हैं कि यू-विन केवल डिजिटल संदेशों की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस बदलती स्वास्थ्य व्यवस्था की तस्वीर है जो यह सुनिश्चित कर रही है कि चाहे कोई बच्चा अपने गांव में हो या मां के साथ मायके में, उसकी स्वास्थ्य सेवाओं की कड़ी कहीं से भी टूटने न पाए।

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