बाराबंकी। उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण समाज के सबसे प्रभावशाली और जनाधार वाले नेताओं में शुमार एक नाम बाराबंकी जिले के युवा सपा नेता करूणेश द्विवेदी उर्फ के.डी का आता है। लखनऊ विश्वविद्यालय की छात्रसंघ राजनीति से निकले करूणेश द्विवेदी को लंबे समय से प्रदेश की सवर्ण राजनीति, विशेषकर ब्राह्मण समाज की मजबूत आवाज माना जाता रहा है। वह राजधानी लखनऊ के सीमावर्ती जनपदों में खासतौर पर युवाओं के बीच खासा लोकप्रिय है। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के करीबी होने के नाते वह पार्टी में ब्राह्मण राजनीति के बड़े चेहरों में गिने जाते है। विदित हो कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरण हमेशा चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा रहे हैं। 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी अब ब्राह्मण मतदाताओं तक अपनी पहुंच बढ़ाने में जुटी है। इसी कड़ी में पार्टी ने 17 जून को लखनऊ स्थित कार्यालय में ब्राह्मण समाज के नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई। जिसे आगामी चुनावी रणनीति की दिशा तय करने वाला कदम माना जा रहा है। इस बैठक में सांसद सनातन पाण्डेय, नेता प्रतिपक्ष विधानसभा माता प्रसाद पाण्डेय, पूर्व विधायक संतोष पाण्डेय, सांसद राजीव राय, पूर्व मंत्री तारकेश्वर मिश्रा, विधायक अमिताभ बाजपेयी के अलावा करूणेश द्विवेदी समेत कई अन्य ब्राह्मण नेता मौजूद रहे। पार्टी पांच अगस्त को जनेश्वर मिश्र जयंती के अवसर पर ब्राह्मण समाज को विशेष संदेश देने की तैयारी कर रही है। सपा नेतृत्व मानता है कि यह अवसर सामाजिक संवाद और राजनीतिक पहुंच बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।read more:https://pahaltoday.com/50-thousand-devotees-performed-darshan-and-puja-at-gadbadra-dham/ सूत्रों की माने तो युवा सपा नेता करूणेश द्विवेदी का इस बैठक में शामिल होना यह साफ संकेत मिल रहा है कि सपा आने वाले समय में करूणेश द्विवेदी को उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा दायित्व देने की तैयारी कर चुकी है। दरअसल, सपा लंबे समय से उत्तर प्रदेश में ऐसे प्रभावशाली ब्राह्मण चेहरे की तलाश में थी, जिसकी पकड़ केवल राजनीति तक सीमित न होकर समाज के भीतर भावनात्मक और वैचारिक स्तर तक हो। करूणेश द्विवेदी इस कसौटी पर पूरी तरह खरे उतरते दिखे। उनकी पहचान एक ऐसे युवा नेता की रही है, जो मंच से बोलता भी है, संघर्ष भी करता है और समाज के सम्मान के मुद्दों पर सड़क से सदन तक आवाज उठाने का साहस भी रखता है। करूणेश द्विवेदी ने अभी तक चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन समाज के भीतर भावनात्मक पकड़ रखने वाले जननेता हैं। गांवों की चौपाल से लेकर शहरों के बुद्धिजीवी वर्ग तक, ब्राह्मण समाज के बीच उनकी गहरी पैठ है। उनके समर्थकों की सक्रिय टीम पूरे प्रदेश में काम करती है। यही कारण है कि सपा अब उन्हें सवर्ण समाज, विशेषकर ब्राह्मण वर्ग के बड़े प्रतिनिधि चेहरे के रूप में आगे बढ़ाती दिखाई दे रही है। करूणेश द्विवेदी ब्राह्मण समाज के सम्मान और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए उनके साथ खड़े नज़र आते है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण राजनीति का जो बड़ा स्पेस लंबे समय से खाली महसूस किया जा रहा था, उसमें करूणेश द्विवेदी तेजी से उभरे हैं। सपा के भीतर भी उन्हें अब एक ऐसे चेहरे के रूप में देखा जा रहा है जो सवर्ण समाज को प्रभावी ढंग से जोड़ने की क्षमता रखते हैं।