नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को एवियन में अपनी सफल यात्रा की झलकियां साझा की।जहां उन्होंने नेताओं के साथ अहम मुद्दों पर अपने विचार साझा किए। प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘एवियन में सफल G7 समिट की झलकियां साझा कर रहा हूं, जहां दुनिया के नेता एक साथ आए और हमारी धरती के सामने मौजूद अहम मुद्दों और चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए।’ इवियन में संबोधन दिया-प्रधानमंत्री ने बुधवार को फ्रांस के इवियन में एक आउटरीच सत्र को संबोधित किया। यह सत्र ‘एआई के सुरक्षित, तेज और कुशल कार्यान्वयन सुनिश्चित करना’ विषय पर था। उन्होंने कहा कि एआई मानव सभ्यता की दिशा बदलने की क्षमता रखती है। यह लोगों को सशक्त भी बनाए। भारत ने इसी विचार के साथ हाल ही में एआई इम्पैक्ट समिट की मेजबानी की थी। भारत का एआई के लिए मानव-केंद्रित दृष्टिकोण है। यह प्रौद्योगिकी समावेशन, सुरक्षा और सार्वजनिक भलाई के सिद्धांतों पर आधारित होनी चाहिए। भारत ने हमेशा साइबरस्पेस को वैश्विक सार्वजनिक भलाई के रूप में देखा है। लोकतांत्रिक देशों को ऐसे एआई मॉडल तक पहुंच मिलनी चाहिए जो उनकी महत्वपूर्ण सूचना बुनियादी ढांचे को सुरक्षित कर सकें। एआई विकास के लिए सुझाव-प्रधानमंत्री ने एआई विकास के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण का आह्वान किया।इसमें सुरक्षा, गति और दक्षता को एक साथ निपटाया जाए। उन्होंने इस संबंध में चार सुझाव दिए। पहला, कृत्रिम बुद्धिमत्ता सिस्टम डिजाइन द्वारा सुरक्षित होने चाहिए। दूसरा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के परिनियोजन के साथ सामान्य मानक, परीक्षण ढांचे और नियामक दिशानिर्देश हों।वैश्विक सहयोग और लाभ-तीसरा सुझाव था कि डीपफेक, गलत सूचना और साइबर धोखाधड़ी से निपटने के लिए प्रभावी वैश्विक सहयोग हो।read more:https://pahaltoday.com/sukesh-chandrashekhar-granted-bail-in-rs-200-crore-money-laundering-case/ चौथा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लाभ ग्लोबल साउथ के देशों तक पहुंचने चाहिए। इससे एक समावेशी दुनिया सुनिश्चित होगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता को मानव क्षमता का विस्तार करना चाहिए, मानव पसंद को सशक्त करना चाहिए और मानव गरिमा की रक्षा करनी चाहिए। भारत इन उद्देश्यों को बढ़ावा देने के लिए भागीदारों के साथ काम करता रहेगा।