सरकारी तालाब में जेसीबी से समतलीकरण पर विवाद, मनरेगा नियमों की अनदेखी का आरोप

संवाददाता किरतपुर – किरतपुर ब्लॉक के ग्राम शाहपुर सुख्खा में स्थित सरकारी तालाब पर जेसीबी मशीन से मिट्टी खुदाई और समतलीकरण कराए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने इस कार्य पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि सरकारी तालाब पर मशीनों का प्रयोग कर न केवल नियमों की अनदेखी की जा रही है, बल्कि ग्रामीण मजदूरों के रोजगार के अवसर भी छीने जा रहे हैं।read more:https://worldtrustednews.in/intensive-campaign-under-mission-shakti-phase-5-0-in-ghazipur-anti-romeo-team-activated/ग्रामीणों के अनुसार, शाहपुर सुख्खा स्थित इस सरकारी तालाब को किरतपुर क्षेत्र के एक व्यक्ति ने मछली पालन और सिंघाड़े की खेती के उद्देश्य से पट्टे पर लिया है। आरोप है कि तालाब को अपने उपयोग के अनुरूप बनाने के लिए जेसीबी मशीन से मिट्टी की खुदाई, उठान और समतलीकरण का कार्य कराया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी भूमि और सार्वजनिक संपत्ति पर इस प्रकार मशीनों से कार्य कराना कई सवाल खड़े करता है तथा इसकी वैधता की जांच होनी चाहिए।ग्रामीणों का कहना है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजित करना और तालाबों के जीर्णोद्धार, जल संरक्षण एवं अन्य विकास कार्यों को श्रम आधारित तरीके से संपन्न कराना है। ऐसे कार्यों में स्थानीय मजदूरों को रोजगार मिलता है और सरकारी परिसंपत्तियों का संरक्षण भी सुनिश्चित होता है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि तालाब पर आवश्यक सुधार कार्य मनरेगा या अन्य निर्धारित सरकारी प्रक्रिया के तहत कराए जाते तो गांव के दर्जनों मजदूरों को काम मिल सकता था। इसके बजाय जेसीबी मशीन के उपयोग से रोजगार के अवसर प्रभावित हो रहे हैं और सरकारी योजनाओं की मूल भावना भी कमजोर पड़ रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि यह स्पष्ट किया जाए कि तालाब पर चल रहा कार्य किस नियम और किस अनुमति के तहत कराया जा रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की है कि मशीनों के उपयोग की वैधता की जांच कराई जाए तथा यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।समाचार लिखे जाने तक इस संबंध में संबंधित विभागीय अधिकारियों का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका था। उधर ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी तालाब जैसी सार्वजनिक संपत्तियों पर होने वाले कार्यों में पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंच सके और ग्रामीणों के रोजगार के अधिकार प्रभावित न हों।ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

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