लखनऊ: पांडुलिपियां भारत की विशाल अमूल्य संपदा हैं भारत का संचित-ज्ञान हैं भारत की शक्ति है भारत की आत्मा है I इस बार योगी जी की पाती संचित-ज्ञान के महत्व ,पांडुलिपियों की महत्ता पर आयी है Iउक्त उद्गार व्यक्त करते हुए समाजसेवी संजय अवस्थी ने कहा कि भारत की आत्मा और आधार संचित-ज्ञान है I संचित-ज्ञान भारत की शक्ति है I भारत की सांस्कृतिक, बौध्दिक सम्पन्नता में संचित-ज्ञान ही तो है I जो भारत को निरन्तर सांस्कृतिक और बौध्दिक रूप से समृद्ध और सम्पन्न करता रहा है I श्री अवस्थी ने कहा कि भारत जागृत ज्ञान चेतना का देश है I भारत की विशिष्टता संचित-ज्ञान, सांस्कृतिक, बौद्धिक सम्पन्नता और जागृत ज्ञान चेतना है I श्री अवस्थी ने कहा कि विश्व की जिज्ञासा और उत्सुकता भारत के संचित-ज्ञान में सदैव से रही है I श्री अवस्थी ने कहा कि ज्ञान में भारत सदैव समृद्ध और सम्पन्न रहा है I श्री अवस्थी ने कहा कि संचित-ज्ञान के आलोक में हम वर्तमान नवाचार के पथ पर सुगमता से अग्रसर होते रहेंगे I संचित ज्ञान हमारी शक्ति है जिसे सदियों से पांडुलिपियों के रूप में सहेजा गया I भारत की सांस्कृतिक बौद्धिक धरोहर एवं सभ्यतागत विचारों की निरन्तरता पांडुलिपियों की विशाल संपदा में परिलक्षित होती है I भारतीय ग्रंथ विज्ञान, चिकित्सा, गणित, खगोल विज्ञान, साहित्य, कला, वास्तुकला, दर्शन, संगीत और आध्यात्मिकता जैसे विषयों का ज्ञान भंडार है I read more:https://pahaltoday.com/sampoorna-samadhan-diwas-today-district-magistrate-will-listen-to-public-problems-in-sevrai-tehsil/ मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ जी पाती में लिखते हैं कि उत्तर प्रदेश सांस्कृतिक पुनर्जागरण की पुण्यभूमि है I अयोध्या में प्रभु श्रीराम का भव्य मन्दिर हो या अविनाशी काशी, हम सब इसके साक्षी हैं I पीढ़ियों से संचित ज्ञान का लाभ आज हम इसलिए ले पा रहे हैं, क्योंकि ये पांडुलिपियां हजारों वर्षो से ज्ञान चेतना जागृत करती रहीं I ये पांडुलिपियां आज विभिन्न संग्रहालयों, पुस्तकालयों एवं निजी संग्रहों में उपलब्ध हैं I मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ जी पाती में लिखते हैं कि ज्ञान विस्तार के संदर्भ में भारत सरकार की एक एतिहासिक पहल है ‘ज्ञान भारतम मिशन’ I इसके तहत प्राचीन पांडुलिपियां डिजिटलाइज की जा रही हैं I इसी क्रम में एक नेशनल डिजिटल रिपोजिटरी बनाई जाएगी I जहां दुनिया भर के विद्यार्थी, शोधकर्ता भारत की ज्ञान परम्परा से जुड़ सकेंगे I मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी पाती का प्रारम्भ एक प्रश्न से करते हुए लिखते हैं कि मैं आपसे पूछूं कि भारत की आत्मा क्या है? बहुत सम्भव है आपका उत्तर वेद, उपनिषद, पुराण, रामायण, महाभारत, गीता, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम, लीलाधर श्रीकृष्ण, महात्मा बुद्ध, भगवान महावीर, गुरु नानक देव, संत कबीर, मानवता में कोई एक हो I यही मन में सहज जिज्ञासा होती है कि कैसे?.. उत्तर है, भारत की यह अक्षुण्ण पहचान श्रवण परंपरा से पांडुलिपियों में संरक्षित की गयी और तकनीकी उन्नयन के बाद ग्रंथो के रूप में घर घर पहुंची I यही कारण है कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी पांडुलिपियों को भारत की आत्मा का अध्याय मानते हैं I श्री अवस्थी ने कहा कि ज्ञान विस्तार के लिए हो रहे इन प्रयासों से जहां एक ओर विश्वभर के विद्यार्थी, शोधार्थी भारत की ज्ञान परम्परा से जुड़ सकेंगे लाभान्वित हो सकेंगे वहीं अन्य लोग भी इससे जुड़कर लाभान्वित हो सकेंगे I