समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विश्वविख्यात एवं सामाजिक सरोकारों से गहराई से जुड़े जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से एम.ए., एम.फिल., पीएच.डी. एवं डी.लिट. की उपाधियाँ प्राप्त करने वाले एवं जनचेतना आधारित वैचारिक सक्रियता के लिए जाने जाने वाले डॉ. दिलीप कुमार गौतम ने आज समाजवादी विचारधारा और जनसरोकारों के क्रम में माननीय अखिलेश यादव जी से समाजवादी पार्टी कार्यालय में शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने अपनी प्रथम पुस्तक “अशोकावदान” उन्हें भेंट की, जिसमें सम्राट अशोक के जीवन, बौद्ध धर्म के प्रति उनकी गहन आस्था तथा धम्म के माध्यम से उनके करुणामय, मानवतावादी और लोककल्याणकारी दृष्टिकोण को ऐतिहासिक एवं भावनात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया है। डॉ. गौतम ने बताया कि उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने दिल्ली में रहकर केवल सोशल मीडिया आधारित पहचान या वर्चुअल सक्रियता के बजाय यह निर्णय लिया कि वे अपने गृह प्रदेश उत्तर प्रदेश में लौटकर सीधे जनता के बीच रहेंगे और उनकी समस्याओं को समझकर उनके समाधान के लिए कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य जमीनी स्तर पर समाज से जुड़कर वास्तविक जनजीवन को समझना और उसी के आधार पर जनसेवा करना रहा है। उन्होंने अपनी शैक्षणिक एवं व्यावसायिक यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस एवं ज़ाकिर हुसैन कॉलेज जैसे प्रतिष्ठित महाविद्यालयों में अध्यापन कार्य किया, परंतु उनका मन निरंतर जनसरोकारों की ओर अधिक केंद्रित रहा। इसी कारण उन्होंने अध्यापन कार्य से अलग होकर अपने प्रदेश के लोगों के बीच जाकर सामाजिक कार्यों को प्राथमिकता दी और पिछले लगभग आठ वर्षों से उत्तर प्रदेश के गाँवों एवं कस्बों में रहकर लोगों की समस्याओं को समझने तथा उनके समाधान की दिशा में निरंतर प्रयास कर रहे हैं। डॉ. गौतम ने यह भी बताया कि जे.एन.यू. उनके जीवन का वह बौद्धिक और वैचारिक केंद्र रहा, जहाँ अध्ययन के साथ-साथ उन्होंने छात्र आंदोलनों और छात्र राजनीति में सक्रिय भागीदारी की। इसी क्रम में वे माही-मांडवी हॉस्टल अध्यक्ष, काउंसलर तथा जे.एन.यू. छात्रसंघ के प्रेजिडेंशियल प्रत्याशी भी रहे, जिसने उनके भीतर नेतृत्व, संघर्ष और जनसंवाद की गहरी समझ विकसित की। उन्होंने बताया कि आज माननीय अखिलेश यादव जी से हुई यह मुलाकात केवल एक औपचारिक भेंट नहीं थी, बल्कि विचारों और जनसरोकारों के बीच एक आत्मीय संवाद का अवसर था। बातचीत के दौरान शिक्षा व्यवस्था, NEET से जुड़े छात्र हितों तथा आगामी विधानसभा चुनावों और राजनीतिक परिस्थितियों पर भी सार्थक चर्चा हुई, जिसमें युवाओं के भविष्य, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती जैसे प्रश्न प्रमुख रहे। इस पूरे संवाद में एक आत्मीयता और भावनात्मक जुड़ाव का अनुभव रहा, जिसे डॉ. गौतम ने अपने जीवन का अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक क्षण बताया।read more:https://pahaltoday.com/dm-and-sp-held-a-meeting-with-traders-regarding-strengthening-of-trader-security/इसी भावनात्मक वातावरण में उन्होंने अपनी पुस्तक “अशोकावदान” भेंट की, जिसे उन्होंने केवल एक साहित्यिक रचना नहीं, बल्कि अपने भीतर वर्षों से संचित विचारों, अनुभवों और संवेदनाओं का परिणाम बताया। उन्होंने यह भी बताया कि यह उनकी प्रथम पुस्तक है तथा इस वर्ष उनकी अन्य पुस्तकें भी प्रकाशित होंगी, जो सामाजिक, बौद्धिक एवं जनमुद्दों से संबंधित होंगी। उनके अनुसार यह पुस्तक सम्राट अशोक के माध्यम से करुणा, अहिंसा और सामाजिक न्याय की भारतीय परंपरा को पुनः समझने और महसूस करने का एक विनम्र प्रयास है, जो उनके जीवन की वैचारिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव भी है।

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