प्रस्तावित लिंक एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर जिले में हलचल तेज हो गई है। किसानों द्वारा कम सर्किल रेट पर मुआवजे को लेकर उठाई जा रही मांग को जनप्रतिनिधियों ने गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष प्रमुखता से रखा। इस दौरान किसानों को उनकी जमीन का उचित मूल्य दिलाने पर जोर दिया गया।लखनऊ में हुई बैठक में सांसद मुकेश राजपूत, विधायक नागेंद्र सिंह राठौर, विधान परिषद सदस्य प्रांशु दत्त द्विवेदी तथा भाजपा जिलाध्यक्ष फतेहचंद्र वर्मा ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। जनप्रतिनिधियों ने बताया कि एक्सप्रेसवे परियोजना के अंतर्गत जिन क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण प्रस्तावित है, वहां सर्किल रेट वास्तविक बाजार कीमत से काफी कम निर्धारित हैं, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान होने की आशंका है।read more:https://khabarentertainment.in/the-disabled-victim-set-out-on-a-march-to-lucknow-threatening-self-immolation/उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि खिमसेपुर क्षेत्र में जमीन की सरकारी दरें औद्योगिक संभावनाओं के बावजूद काफी कम हैं, जबकि आसपास के क्षेत्रों में बाजार मूल्य कहीं अधिक है। इसी प्रकार अन्य ग्रामीण इलाकों में भी कागजी दरें वास्तविक कीमत से मेल नहीं खा रहीं, जिससे किसानों में असंतोष बढ़ रहा है।जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि वर्तमान प्रावधानों के अनुसार सर्किल रेट के आधार पर दिया जाने वाला मुआवजा किसानों के लिए पर्याप्त नहीं है। इतनी राशि में वे अन्य स्थान पर समान भूमि क्रय करने में सक्षम नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में किसानों की मांग है कि मुआवजा बाजार दर के अनुरूप तय किया जाए।मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि संबंधित क्षेत्रों का पुनः सर्वे कराया जाए और वास्तविक बाजार मूल्य का आकलन कर उसी के अनुरूप मुआवजा सुनिश्चित किया जाए। साथ ही उन्होंने किसानों को बेहतर मुआवजा दिलाने के लिए सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिया।बैठक के बाद जनप्रतिनिधियों ने कहा कि एक्सप्रेसवे परियोजना क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन किसानों के हितों की अनदेखी नहीं की जा सकती। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार के निर्देशों के बाद किसानों को न्यायसंगत मुआवजा मिलेगा।अब पूरे मामले में किसानों और स्थानीय लोगों की नजर आगामी कार्रवाई पर टिकी है, कि सरकार द्वारा दिए गए आश्वासन कब तक धरातल पर लागू होते हैं।