नई दिल्ली। तमिलनाडु के इन परिणामों का असर उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी साफ देखा जा रहा है। यूपी के प्रतापगढ़ की कुंडा सीट से विधायक और जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के प्रमुख रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने इन नतीजों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। राजा भैया ने डीएमके प्रमुख एम.के. स्टालिन और उनके बेटे उदयनिधि स्टालिन की हार को सीधे तौर पर सनातन धर्म के अपमान से जोड़ते हुए इसे जनता का करारा जवाब बताया है। राजा भैया ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा, मिट गये सनातन को मिटाने का सपना देखने वाले। अपनी बात को वजन देने के लिए उन्होंने अपना 3 सितंबर 2023 का वह पुराना ट्वीट भी रिट्वीट किया, जिसमें उन्होंने उदयनिधि स्टालिन के उस विवादित बयान का कड़ा विरोध किया था, जिसमें सनातन धर्म की तुलना घातक बीमारियों से की गई थी। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों ने देश की राजनीतिक दिशा में नई हलचल पैदा कर दी है। इन नतीजों के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। जहां बंगाल, असम और पुडुचेरी में भाजपा ने भारी बहुमत के साथ अपनी सत्ता सुरक्षित की है, वहीं दक्षिण भारत के चुनावी नतीजों ने सबसे ज्यादा चौंकाया है।read more:https://khabarentertainment.in/patriotic-songs-echoed-in-mushaira-and-kavi-mahotsav/ केरल में कांग्रेस ने अपनी पकड़ मजबूत की है, तो तमिलनाडु में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। तमिलनाडु में विजय थलापति की पार्टी टीवीके ने एम.के. स्टालिन की डीएमके को शिकस्त देकर कांग्रेस के साथ गठबंधन की सरकार बनाने की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। विदित हो कि साल 2023 में एक सम्मेलन के दौरान उदयनिधि स्टालिन ने कहा था कि सनातन धर्म मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों की तरह है, जिसे केवल विरोध नहीं करना चाहिए बल्कि जड़ से मिटा देना चाहिए। उस समय भी राजा भैया ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि यह बयान हिंदुओं के प्रति घृणा को दर्शाता है। अब चुनावी नतीजों के बाद राजा भैया का यह हमला संकेत देता है कि उदयनिधि के बयानों ने हिंदू मतदाताओं के बीच जो नाराजगी पैदा की थी, उसका खामियाजा डीएमके को भुगतना पड़ा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राजा भैया इस मुद्दे के जरिए यूपी में भी अपने हिंदुत्ववादी आधार को और अधिक मजबूती देना चाहते हैं।