नई दिल्ली। साल 2014 में जब सुनील बंसल को उत्तर प्रदेश में संगठन महामंत्री बनाकर भेजा गया, तब राज्य में भाजपा की स्थिति कमजोर थी।बड़े नाम होने के बावजूद, पार्टी को सुनने वाला कोई नहीं था। ऐसे में अमित शाह की एंट्री हुई, जिन्होंने बंसल के शब्दों को अपना बताते हुए कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भर दी। इस रणनीति का परिणाम यह हुआ कि 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने यूपी की 80 में से रिकॉर्ड 73 सीटें जीतीं। इसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी गठबंधन ने 403 में से 312 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में भाजपा को शिखर पर पहुंचाने के बाद, बंसल को अब पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के अजेय किले को ढहाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई। बंगाल विधानसभा चुनाव के रुझानों में भाजपा को मिली बंपर बढ़त बंगाल में पहली बार सरकार बनाने के उसके सपने को साकार करती दिख रही है। यह जीत कई स्थानीय नेताओं की मेहनत का नतीजा है, लेकिन दूसरे राज्यों से आए सुनील बंसल ने कुछ ही महीनों में जमीन तैयार करने में अहम भूमिका निभाई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के करीबी माने जाने वाले बंसल ने कई महीने बंगाल में बिताए और डर को दूर भगाओ, भरोसा रखो का नारा दिया। संगठन कौशल में माहिर बंसल ने चुनाव रणनीतिकार भूपेंद्र यादव, बिप्लब देब और अनिल मालवीय के साथ मिलकर एक चतुराई भरी रणनीति तैयार की, जिसे एग्जिट पोल में भी ममता बनर्जी के गढ़ को ध्वस्त करता दिखाया गया।read more:https://khabarentertainment.in/saharanpur-lucknow-passenger-train-expected-to-resume-operations/ इस रणनीति का पहला चरण ममता को सीधा निशाना न बनाना था, बल्कि टीएमसी विधायकों के खिलाफ माहौल बनाना था। भाजपा ने करीब 80 प्रेसवार्ता कर 220 विधानसभा क्षेत्रों में टीएमसी विधायकों के खिलाफ आरोपपत्र जारी किए। जिला स्तर पर भी आरोपपत्र जारी हुए, और शाह ने स्वयं ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ आरोपपत्र जारी कर उनकी मुश्किलें बढ़ा दीं। इस अभियान के कारण टीएमसी को अपने 77 उम्मीदवार बदलने पड़े। इसके बाद, भाजपा ने बंगाल में 10,000 किलोमीटर लंबी परिवर्तन यात्रा शुरू कर माहौल को और गरमा दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोलकाता के ब्रिगेड ग्राउंड में हुई पहली जनसभा ने बंगाल में भाजपा के प्रति भारी उत्साह और बदलाव की संभावना को स्पष्ट किया। इस रैली में 5 लाख से अधिक लोग जुटे, जिससे ममता के माथे पर चिंता की लकीरें उभरीं, क्योंकि कहा जाता है कि ब्रिगेड ग्राउंड की जीत बंगाल की जीत होती है। बाद में, बिप्लब देब से मिली प्रतिक्रिया के आधार पर, भाजपा ने ममता बनर्जी के खिलाफ सीधा अभियान शुरू किया और मतदाताओं को मां-माटी-मानुष के खिलाफ हुए अत्याचारों की याद दिलाई। युवाओं और महिलाओं पर विशेष ध्यान दिया गया, जिनके लिए लाखों युवा कार्ड और मातृशक्ति कार्ड प्रपत्र भरे गए। पूरे चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री शाह और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने राज्यभर में सैकड़ों रैलियां और रोड शो किए, जिन्होंने बंगाल में भाजपा की जड़ें जमाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।