नई दिल्ली। भारतीय जहाजों को पूरी सुरक्षा और लचीलापन प्रदान किया जा रहा है।रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार प्रोजेक्ट पर उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद यह काम कभी नहीं रुका। चाबहार-जाहेदान रेलवे का काम 90 प्रतिशत पूरा हो चुका है और जून के मध्य तक रेल बिछाने का कार्य संपन्न हो जाएगा। साथ ही, अगस्त-सितंबर 2026 तक वहां अस्पताल और होटलों जैसी सुविधाएं भी तैयार हो जाएंगी। ईरान और अमेरिका के बीच गहराते सैन्य और कूटनीतिक तनाव के बीच भारत में ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फतहाली ने तेहरान का रुख स्पष्ट कर दिया है। एक विशेष बातचीत के दौरान राजदूत ने साफ कहा कि ईरान किसी भी दबाव के आगे घुटने नहीं टेकेगा और वह एक लंबी लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने अमेरिकी दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ईरान के ढहने की बातें केवल प्रोपेगैंडा हैं और हकीकत इससे कोसों दूर है। राजदूत फतहाली ने स्पष्ट किया कि ईरान अमेरिका के साथ बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन उसकी प्राथमिकता स्थायी और टिकाऊ शांति है। उन्होंने कहा कि हम युद्ध और सीजफायर के अंतहीन चक्र में नहीं फंसना चाहते। ईरान की शर्तें बेहद स्पष्ट हैं- एनपीटी के तहत शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा का अधिकार और ईरान पर लगे अन्यायपूर्ण और अमानवीय प्रतिबंधों को पूरी तरह खत्म करना। उन्होंने कहा कि पिछले 47 वर्षों से अमेरिका ने ईरान की संपत्ति फ्रीज कर और दवाओं तक पर रोक लगाकर ईरानी जनता के साथ अन्याय किया है, लेकिन देश की राष्ट्रीय गरिमा पर कोई समझौता नहीं होगा।क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापार के मुद्दे पर राजदूत ने भारत के लिए सकारात्मक संकेत दिए। उन्होंने कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री यातायात अंतरराष्ट्रीय नियमों के अधीन है। जिन देशों ने ईरान पर हमलों में हिस्सा नहीं लिया, खासकर भारत जैसे मित्र देश, उनके जहाजों के लिए कोई रोक नहीं है। सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह सैयद मोजतबा खामेनेई की सेहत को लेकर उड़ रही अफवाहों पर विराम लगाते हुए राजदूत ने कहा कि वे पूरी तरह स्वस्थ हैं और स्थिति को संभाल रहे हैं। वहीं, ईरान में रहने वाले लगभग 10,000 भारतीयों और सिख समुदाय की सुरक्षा पर उन्होंने भरोसा दिलाया कि उनके धार्मिक अधिकारों और जान-माल की रक्षा सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने क्षेत्र में अस्थिरता का सारा दोष अमेरिका और इजरायल की आक्रामक नीतियों पर मढ़ा।