ऑनलाइन भोग: मनुष्य की विकृति की सचमुच कोई सीमा नहीं…

वीरेंद्र बहादुर सिंह 
क्या आपने सीएनएन की यह दहला देने वाली ताजा रिपोर्ट पढ़ी? इस खोजी रिपोर्ट की बात करने से पहले थोड़ा फ्लैशबैक में जाना पड़ेगा। आपको याद हो तो कुछ वर्ष पहले गिजेल पेलिकोट नामक एक अभागी फ्रांसीसी महिला के मामले ने दुनिया को झकझोर दिया था। गिजेल का पति डोमिनिक पेलिकोट उसे चोरी-छिपे बेहोशी की दवा देता था। वह बेहोश हो जाती तो उसके साथ बलात्कार करता। बात यहीं नहीं रुकती। यह आदमी इतना विकृत था कि बाहर से अंजान पुरुषों को घर बुलाता, फिर अपनी बेहोश पत्नी को दिखाकर कहता कि जाओ, इसके साथ जो करना हो करो।read more:https://pahaltoday.com/india-helps-maldives-which-is-facing-economic-crisis-releases-first-installment-of-rs-30-billion/एक-दो नहीं, बल्कि अनेक पुरुषों से उसने अपनी पत्नी का बलात्कार करवाया। जब दूसरे पुरुष उसकी पत्नी के साथ कुकर्म करते, तब डोमिनिक बैठकर देखता, इतना ही नहीं, वीडियो भी बनाता और अपने कंप्यूटर में सहेज लेता। यह सिलसिला दस वर्षों तक चलता रहा। बेचारी स्त्री को कुछ पता ही नहीं था कि उसके शरीर के साथ क्या-क्या हो रहा है। वह तो यही मानती रही कि मेरा वैवाहिक जीवन सुखी है, स्थिर है और मेरा पति मुझसे प्रेम करता है। लेकिन शरीर तो अपना असर दिखाता है। उसे बहुत अधिक ड्रग्स दी गई थीं और अनेक पुरुषों ने उसके शरीर का शोषण किया था, जिसका असर धीरे-धीरे सामने आने लगा। उसकी याददाश्त कमजोर होने लगी, वजन घटने लगा। फिर भी उसे संदेह तक नहीं हुआ कि वह यौन शोषण की शिकार है। वह तो यही सोचती रही कि आजकल तबीयत ठीक नहीं रहती। उसके पति ने तो उसके मन में यह तक बैठाने की कोशिश की थी कि उसे अल्जाइमर हो गया है। आखिर 2020 में इस पाप का घड़ा भर गया। उसकी विकृति घर तक सीमित नहीं थी। वह एक शापिंग माल में स्कर्ट पहनी लड़कियों के गुप्त वीडियो बनाते पकड़ा गया। पुलिस ने उसके उपकरण जब्त किए और उसके लैपटॉप तथा पेन ड्राइव से मिला खजाना देखकर अधिकारी स्तब्ध रह गए। दवा देकर बेहोश की गई पत्नी पर डोमिनिक और अन्य पुरुषों द्वारा किए गए बलात्कारों के हजारों वीडियो मिले। कम से कम 70 पुरुषों ने बेहोशी की हालत में पड़ी गिजेल का शरीर भोगा था। सच्चाई सामने आई तो गिजेल सदमे में जड़ हो गई। मामला अदालत में गया। 2024 में डोमिनिक को बीस वर्ष के कठोर कारावास की सज़ा हुई। सामान्यतः स्त्री को घर से बाहर सुरक्षा के मामले में सतर्क रहना पड़ता है, लेकिन यहां तो अपने ही घर में, अपने ही किले में, जिस पर सबसे अधिक भरोसा किया था उसी पति ने इतना भयानक विश्वासघात किया। लेकिन बात यहीं समाप्त नहीं होती। अब सीएनएन की रिपोर्ट का असली हिस्सा सामने आता है। सीएनएन की खोजी टीम ने महीनों तक जांच की, फील्ड रिपोर्टिंग की, डिजिटल जांच की, छद्मवेश में अनेक लोगों से बात की और जो काली सच्चाई सामने आई, वह यह थी: गिजेल पेलिकोट का मामला तो केवल एक झलक है। सच्चाई यह है कि एक पूरी डिजिटल व्यवस्था चल रही है, जहां गिजेल जैसी हजारों निर्दोष महिलाओं पर बेहोशी की हालत में बलात्कार किए जाते हैं, उनके वीडियो देखे जाते हैं, साझा किए जाते हैं, खरीदे-बेचे जाते हैं। इंटरनेट पर ऐसे कई प्लेटफार्म हैं, जहां दवा देकर बेहोश की गई महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचार के वीडियो स्लीप कंटेंट या पास्ड आउट जैसी श्रेणियों में डाले जाते हैं। कुछ वीडियो आई चेक टैग के साथ होते हैं, जिनमें महिला की आंखें जबरन खोलकर यह साबित किया जाता है कि वह सचमुच बेहोश है। ऐसे वीडियो बनाने वाले तो हैं ही, देखने वालों की संख्या लाखों नहीं, करोड़ों में है। इस तरह की सामग्री वाली एक वेबसाइट को केवल फरवरी महीने में 6 करोड़ 20 लाख व्यू मिले। टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग ऐप्स पर भी ऐसी सामग्री खूब साझा होती है। फ्रांस के एक कानूनी विशेषज्ञ ने तो टेलीग्राम को आनलाइन रेप अकादमी तक कहा है। यहां पुरुष एक-दूसरे को सलाह देते हैं, स्त्री को कौन-सी दवा देनी है, कितनी मात्रा में, कैसे देनी है, कैसे सुनिश्चित करना है कि वह बीच में होश में न आए, कैमरा कहां रखना है, वीडियो कहां अपलोड करना है, कितने व्यूज पर कितने पैसे मिलेंगे। कोई स्लीपिंग लिक्विड तक बेचता है। यह ऐसा गंधहीन और स्वादहीन तरल बताया जाता है, जिसे खाने या चाय-काफी-कोल्ड ड्रिंक में मिलाकर दिया जाए तो पीने वाले को शक भी न हो। सीएनएन के रिपोर्टर से एक विक्रेता ने कहा, “साहब, यह लिक्विड ले जाइए। एक बोतल 150 पाउंड की है। आपकी पत्नी को कुछ पता भी नहीं चलेगा और उसे कुछ याद भी नहीं रहेगा।”read more:https://pahaltoday.com/pawan-khera-gets-a-setback-from-the-high-court-anticipatory-bail-plea-rejected/
कुछ प्लेटफार्म पर इस प्रकार के अपराधों का लाइव स्ट्रीमिंग भी होती है। यदि बेहोश महिला पर हो रहा बलात्कार लाइव देखना हो तो 20 डालर आनलाइन भरने होते हैं। एक ओर अपराध चल रहा होता है, दूसरी ओर विकृत पुरुष स्क्रीन पर देखते हुए टिप्पणी करते हैं, निर्देश देते हैं। दिमाग काम करना बंद कर दे, इतनी घृणित हरकतें हैं ये। लगता है क्या मनुष्य की विकृति की कोई सीमा नहीं? यह विकृति एक पूरे बाजार का रूप ले चुकी है, जिसके केंद्र में केवल एक विचार है, बेहोश स्त्री का शरीर एक वस्तु है, उसके साथ कुछ भी किया जा सकता है। इन बेचारी महिलाओं को पता भी नहीं होता कि उनके वीडियो बनाए जा रहे हैं, लाखों-करोड़ों लोग उन्हें देखकर घिनौना आनंद ले रहे हैं, और वीडियो बनाने वाला कोई दूसरा नहीं, बल्कि स्वयं उनका पति या प्रेमी है। जब स्त्री थकान, भूलने की बीमारी, भ्रम, शरीर पर चोट के निशान या घाव की शिकायत करती है, तो पुरुष कह देता है, “नहीं-नहीं, यह तुम्हारा भ्रम है।” आनलाइन प्लेटफार्म्स पर ऐसे धंधे करने वालों और उन्हें देखने वालों की कमी नहीं है। वे एक-दूसरे को बढ़ावा देते रहते हैं, जिससे उन्हें यह सब सामान्य लगने लगता है। मनोविज्ञान में इस तरह के व्यवहार को पैराफिलिक डिसआर्डर कहा जाता है अर्थात सामने वाले की सहमति के बिना यौन उत्तेजना महसूस करना। सोए हुए या बेहोश व्यक्ति को देखकर यौन उत्तेजना होने को सोम्नोफिलिया कहा जाता है। यहां हम जिस बात की चर्चा कर रहे हैं, वह नॉन-कंसेंशुअल सोम्नोफिलिया है, जो यौन हिंसा का ही एक रूप है। विशेषज्ञ कहते हैं कि यहां मानसिक विकार कम और मेरी पत्नी या गर्लफ्रेंड के शरीर पर मेरा पूरा अधिकार है, जैसी मानसिकता अधिक काम करती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट कहती है कि वैश्विक स्तर पर हर तीन में से एक स्त्री अपने पति या बॉयफ्रेंड द्वारा शारीरिक हिंसा या यौन हिंसा का शिकार हुई है। हर तीन में से एक स्त्री! सीएनएन ने अपनी एज इक्वल्स श्रृंखला में यह रिपोर्ट प्रकाशित कर सीधा सवाल किया है कि आज के समाज में डिजिटल जवाबदेही जैसी कोई चीज है भी या नहीं? इस तरह की अधिकांश घृणित सामग्री डार्क वेब पर नहीं, बल्कि उन वेबसाइटों पर अपलोड होती है, जिन्हें कोई किशोर भी आसानी से देख सकता है। प्रसिद्ध सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स पर भी यह घूमती रहती है। पोर्नोग्राफी के भयावह बाजार का आकार डिजिटल तकनीक के विकास के बाद और भी भयानक हो गया है और उसकी बलि सबसे निजी माने जाने वाले रिश्ते भी चढ़ रहे हैं। ये सारी बातें मन को विचलित कर देती हैं कि क्या है विवाह संबंध की पवित्रता? कहां गई प्रेम संबंधों की गरिमा? मनुष्य की फुफकारती आदिम वृत्तियां सब कुछ भस्म कर देती हैं, सब कुछ।

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