हापुड बहुजन समाज पार्टी से क्रांतिकारी कैडर युवा लगातार दूरी बनाते जा रहे हैं जिससे हापुड़ विधानसभा 59 में 2027 में बसपा की रहा मुश्किलें बढ़ती जा रही है 2027 के लिए घोषित प्रत्याशी की निरीक्षण से युवा घर बैठने के लिए मजबूर हो रहा है विधानसभा 59 का प्रत्याशी घोषित होते हैं बसपा से युवाओं की दूरी बढ़ती जा रही है संगठन संघर्ष करता नजर आ रहा है युवा दूर जाते नजर आ रहे हैं !read more:https://pahaltoday.com/shailendra-kumar-dwivedi-a-pharmacist-posted-at-the-community-health-center-visheshwarganj-became-the-district-president-of-the-health-department/
विधानसभा 59 के युवा मतदाताओं से बात की गई युवाओं ने अपनी प्रक्रिया देते हुए बताया और अपनी बात कही
दैनिक पहल टुडे अखबार की टीम ने युवा से पूछा 1. युवा वर्ग का बसपा से मोहभंग क्यों भाजपा प्रेम” का आरोप : युवाओं में धारणा है कि बसपा नेतृत्व भाजपा के खिलाफ आक्रामक नहीं है। इसीलिए SC/ST/OBC वोट भाजपा को रोकने के लिए ASP या सपा की तरफ देख रहा है। 2018 SC/ST एक्ट आंदोलन*: सोनू जाटव, राजकुमार जाटव जैसे युवाओं का कहना है कि आंदोलन के बाद 8 साल से कोर्ट के चक्कर काट रहे हैं, पर बसपा नेताओं ने साथ नहीं दिया। प्रत्याशी जल्दी घोषित, पर कमजोर 2027 के लिए बसपा ने प्रत्याशी सबसे पहले घोषित किया, लेकिन जमीनी स्तर पर उसे “कमजोर चेहरा” माना जा रहा है। युवा उसमें लड़ने का दम नहीं देख रहे।
हाथी की मस्त चाल नहीं बढ़ा पा रहा घोषित प्रत्याशी रफ्तार” – संगठन सुस्त क्यों
वजह असर हापुड़-59 पर
कैडर का बिखराव
जाटव के अलावा मुस्लिम, गुर्जर, जाट, ठाकुर, ब्राह्मण समाज अति पिछड़ा वर्ग के एक दर्जन कार्यकर्ता भी नहीं बचे।
15 साल से संगठन निष्क्रियत राजनीतिक विशेषज्ञों के हवाले से: यूपी में बसपा संगठन निष्क्रिय है,
आम लोगों से कटा हुआ है।
दूसरे समाज से दूरी
सुरक्षित सीट होने के बावजूद सिर्फ SC वोट के भरोसे रहना। गैर-जाटव SC और OBC में बसपा की पकड़ ढीली।
मुद्दों पर चुप्पी
मुस्लिम वर्ग के लोगों की आवाज न उठाने का आरोप। युवा इसे “मूकदर्शक” रवैया कह रहे हैं।
2022 का आंकड़ा क्या कहता हे- मुस्लिम 31% + SC 22%
अगर ये वोट बसपा से खिसककर सपा/ASP में गया तो हाथी के लिए तीसरे नंबर पर आना भी मुश्किल।
कैडर वोट
* मतदाताओं ने बताया अपना निष्कर्ष*: हापुड़-59 में बसपा की सबसे बड़ी चुनौती युवाओं को दोबारा जोड़ना और गैर-जाटव समाज में संगठन खड़ा करना है। वरना “हाथी” की चाल सुस्त ही रहेगी