योग भारतीय संस्कृति की अमूल धरोहर है -कमलेश चौधरी

ललितपुर। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर श्री दीपचंद चौधरी महाविद्यालय, ललितपुर में एक भव्य योग एवं स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा कर्मचारियों के बीच योग के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, कर्मचारियों, एनसीसी एवं एनएसएस स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं योग प्रशिक्षक योगाचार्य हरि सोनी ने उपस्थित जनसमूह को विभिन्न योगासनों, प्राणायाम तथा ध्यान की विधियों का अभ्यास कराया। उन्होंने योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक विकास का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ती भागदौड़, तनाव, चिंता और असंतुलित जीवनशैली के कारण अनेक प्रकार की शारीरिक एवं मानसिक समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। ऐसे में योग व्यक्ति को स्वस्थ, संतुलित और सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा प्रदान करता है।योगाचार्य हरि सोनी ने विद्यार्थियों को ताड़ासन, वृक्षासन, भुजंगासन, वज्रासन, पद्मासन, त्रिकोणासन सहित कई महत्वपूर्ण योगासनों का अभ्यास कराया तथा उनके स्वास्थ्य लाभों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नियमित योगाभ्यास से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, पाचन तंत्र मजबूत होता है, रक्त संचार बेहतर होता है तथा मानसिक तनाव में कमी आती है। उन्होंने कहा कि योग मनुष्य को आत्मानुशासन, एकाग्रता और आत्मविश्वास प्रदान करता है, जिससे वह अपने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकता है।कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्रबंधक  कमलेश चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि योग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। विश्व के अनेक देशों ने योग के महत्व को स्वीकार किया है और आज योग वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य एवं कल्याण का माध्यम बन चुका है।read more:https://pahaltoday.com/consumers-booked-for-gas-refill-booking/ उन्होंने विद्यार्थियों से नियमित रूप से योग करने और अपने दैनिक जीवन में इसे अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का विकास होता है और योग इस दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. तोमर ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों का शारीरिक एवं मानसिक विकास भी अत्यंत आवश्यक है। योग विद्यार्थियों में अनुशासन, एकाग्रता तथा सकारात्मक सोच विकसित करता है। उन्होंने कहा कि योग को केवल एक दिन के आयोजन तक सीमित न रखते हुए इसे दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाना चाहिए। इससे व्यक्ति न केवल रोगों से दूर रहता है बल्कि जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार भी होता है।कार्यक्रम के दौरान एनसीसी एवं एनएसएस के स्वयंसेवकों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। स्वयंसेवकों ने योगाभ्यास के माध्यम से स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश दिया तथा उपस्थित विद्यार्थियों को योग के प्रति प्रेरित किया। छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह और अनुशासन के साथ योग क्रियाओं का अभ्यास किया। योगाचार्य द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए सभी प्रतिभागियों ने सामूहिक योगाभ्यास किया।इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त शिक्षकगण एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे। सभी ने योग को जीवन का महत्वपूर्ण अंग बताते हुए इसके नियमित अभ्यास की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान योग के माध्यम से स्वस्थ समाज के निर्माण का संदेश भी दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति प्रतिदिन कुछ समय योग को दे, तो अनेक शारीरिक और मानसिक समस्याओं से बचा जा सकता है।कार्यक्रम का वातावरण अत्यंत उत्साहपूर्ण एवं प्रेरणादायक रहा। विद्यार्थियों ने योग के प्रति अपनी रुचि व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन की अपेक्षा जताई। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को नियमित योगाभ्यास करने तथा अपने परिवार एवं समाज में योग के महत्व का प्रचार-प्रसार करने का संकल्प दिलाया गया।अंत में महाविद्यालय प्रशासन की ओर से योगाचार्य हरि सोनी का आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम का समापन सामूहिक योगाभ्यास, स्वास्थ्य जागरूकता संदेश एवं धन्यवाद ज्ञापन के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर उपस्थित सभी लोगों ने योग को स्वस्थ, सुखी एवं समृद्ध जीवन का आधार बताते हुए इसे अपने दैनिक जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

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