यूपी विस चुनाव: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को भुनाएगी सपा

लखनऊ। अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला भाजपा के लिए जबरदस्त डेंट माना जा रहा है। पार्टी इससे कैसे निपटेगे ये वो जाने, लेकिन विपक्षी दल इसे भुनाने के लिए आतुर दिखाई दे रहे हैं। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने तो इसके लिए बैठकें शुरु कर दी हैं। रणनीति बनाई जाने लगी है।इसी रणनीति के तहत सपा विधानसभा चुनाव में 100 सीटों पर दलित, पिछड़े और मुस्लिमों को टिकट देने का मन बना रही है। वजह ये है कि पिछले लोकसभा चुनाव में सपा ने अपने दलित समाज के अवधेश प्रसाद को मैदान में उतारा गया और उन्होंने अयोध्या में जीत दर्ज की। इसी तरह मेरठ की सामान्य सीट पर भी दलित उम्मीदवार ने बेहद कड़े मुकाबले में विरोधी दल को कड़ी टक्कर दी थी। अब इसी सफल अयोध्या प्लान को आगामी विधानसभा चुनाव में बड़े पैमाने पर दोहराने की योजना है।
फिर इस बार तो अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला पूरे देश में गरमा रहा है। ऐसे में सपा की नजर वोट बैंक पर टिक गई है।इसी विशेष रणनीति के अनुसार, समाजवादी पार्टी अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित 84 सीटों और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित 2 सीटों के अलावा 14 सामान्य सीटों पर भी दलित समाज के उम्मीदवारों को टिकट देगी। सपा ने यह प्रयोग पिछले लोकसभा चुनाव में फैजाबाद (अयोध्या) सीट पर किया था, जहां सामान्य सीट होने के बावजूद दलित समाज के अवधेश प्रसाद को मैदान में उतारा गया और उन्होंने जीत दर्ज की। इसी तरह मेरठ की सामान्य सीट पर भी दलित उम्मीदवार ने बेहद कड़े मुकाबले में विरोधी दल को कड़ी टक्कर दी थी। अब इसी सफल अयोध्या प्लान को आगामी विधानसभा चुनाव में बड़े पैमाने पर दोहराने की योजना है।उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी के भीतर चल रही रणनीतियों के बीच एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है।विभिन्न साक्षात्कारों में अपनी चुनावी रणनीति को गुप्त रखने की बात करने वाले सपा प्रमुख अखिलेश यादव का प्लान 100 लीक हो गया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, साल 2024 के लोकसभा चुनाव की तर्ज पर आगामी विधानसभा चुनाव में भी पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को धार देने के लिए सपा थिंकटैंक ने एक बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत राज्य की करीब 100 सीटों पर दलित और आदिवासी उम्मीदवारों को मैदान में उतारने की तैयारी की जा रही है, जिससे सत्ताधारी दल और अन्य विरोधियों को चुनावी बिसात पर घेरने का मौका मिल सके। read more:https://pahaltoday.com/census-of-india-will-be-digital-in-2027-in-bhadohi/सामान्य सीटों पर दलित उम्मीदवार उतारने के पीछे सपा का मुख्य उद्देश्य राज्य भर में यह संदेश देना है कि पार्टी इस समाज की सच्ची हितैषी है और शासन में उनकी अधिक हिस्सेदारी तय करना चाहती है। पार्टी का मानना है कि पिछले कुछ चुनावों में गैर-जाटव दलित वोटों का झुकाव बदला है और 2024 में इस वर्ग का एक बड़ा हिस्सा सपा के साथ आया था। इस समर्थन को बनाए रखने के लिए यह नया दांव चला जा रहा है, क्योंकि जाटव मतदाताओं को पारंपरिक रूप से उनके मूल दल से अलग करना बेहद कठिन माना जाता है। इस रणनीति के जरिए समाजवादी पार्टी अपनी पुरानी मुस्लिम+यादव (एमवाय) वाली छवि से बाहर निकलकर खुद को सर्वसमाज की पार्टी के रूप में स्थापित करना चाहती है। पिछले आम चुनाव में भी सपा ने केवल सीमित संख्या में यादव उम्मीदवारों को टिकट दिया था, जो सभी सफल रहे। इसके साथ ही कई दलित सांसद भी पार्टी के टिकट पर जीतकर संसद पहुंचे। अब आरक्षित कोटे से बढ़कर टिकट देने का यह नैरेटिव आगामी विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की राजनीति को एक नया मोड़ दे सकता है।

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