मोक्षायतन योगाश्रम में व्यास पूर्णिमा पर होगा यज्ञोपवीत संस्कार

मोक्षायतन योगाश्रम में 29 जुलाई को व्यास पूर्णिमा (गुरुपूर्णिमा) पर्व श्रद्धा एवं आध्यात्मिक वातावरण में मनाया जाएगा। इस अवसर पर अनेक युवाओं का यज्ञोपवीत संस्कार भी संपन्न कराया जाएगा। पर्व की तैयारियों के बीच योग गुरु पद्मश्री स्वामी भारत भूषण ने शिष्यों को संबोधित करते हुए गुरु और संस्कारों के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। स्वामी भारत भूषण ने कहा कि व्यास पूर्णिमा गुरु से बंधने का नहीं, बल्कि साधना से जुड़ने का पर्व है। गुरु किसी को बांधते नहीं, बल्कि संस्कारों की मर्यादा देकर अज्ञानजनित पीड़ाओं से मुक्त करने का मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने साधकों से मनन की प्रवृत्ति विकसित करने का आह्वान करते हुए कहा कि मनुष्य की विशेषता विचार और मनन करने की क्षमता है। उन्होंने यज्ञोपवीत संस्कार को मर्यादा और ब्रह्मचर्य का प्रतीक बताते हुए इसकी तुलना नदी से की। readmore:https://khabarentertainment.in/509-vidyut-sakhis-in-bijnor-receive-thermal-printers-instant-electricity-bill-receipts-will-now-be-available-at-doorsteps/उन्होंने कहा कि जिस प्रकार नदी अपने दोनों किनारों की मर्यादा में बहते हुए मानवता को जीवन देती है, उसी प्रकार मर्यादाओं का पालन करने वाला युवा समाज और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मर्यादा टूटने पर वही शक्ति विनाश का कारण बन सकती है, इसलिए ऋषियों ने युवाओं को संस्कारित करने के लिए यज्ञोपवीत संस्कार की व्यवस्था की। मोक्षायतन योग साधक संघ के अधिष्ठाता एन.के. शर्मा ने बताया कि वर्ष 1973 में गुरुदेव स्वामी भारत भूषण ने यज्ञोपवीत दीक्षा की परंपरा प्रारंभ की थी, जो आज भी निरंतर जारी है। इसी क्रम में 29 जुलाई को व्यास पूर्णिमा के अवसर पर 12 वर्ष से अधिक आयु के नई पीढ़ी के साधकों का यज्ञोपवीत संस्कार कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में नई पीढ़ी का संस्कारों से दूर होना चिंता का विषय है। ऐसे में बच्चों और युवाओं को भारतीय संस्कृति एवं वैदिक परंपराओं से जोड़ने के उद्देश्य से यह संस्कार आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने अभिभावकों से अधिक से अधिक संख्या में बच्चों को इस आयोजन से जोड़ने का आह्वान किया।

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