सलेमपुर बघाई में भागवत सत्संग ज्ञानयज्ञ का तीसरा दिन सम्पन्न, संतों ने भक्ति-ज्ञान का महत्व बताया

गाजीपुर । सलेमपुर बघाई में आयोजित सात दिवसीय ‘श्रीमद् भागवत सद्भावना सत्संग ज्ञानयज्ञ’ के तीसरे दिन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। तीर्थनगरी प्रयागराज से पधारे पूज्य महात्मा सारथानंद जी ने श्रीमद्भागवत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसका वास्तविक सार संतों के सानिध्य में बैठकर आध्यात्मिक अमृत का पान करना है।read more:https://khabarentertainment.in/the-truth-behind-statistics-that-fades-under-the-glare-of-branding/उन्होंने भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की व्याख्या करते हुए कहा कि कलियुग के प्रभाव से भक्ति तो युवा बनी रहती है, लेकिन ज्ञान और वैराग्य निष्क्रिय हो जाते हैं। इसलिए संतों का सानिध्य अत्यंत आवश्यक है। बलिया से आए महात्मा सूर्यानंद जी ने अपने संबोधन में कहा कि सच्ची भक्ति करना सरल नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक व्यक्ति में जाति, वर्ण, ऊंच-नीच और अहंकार का भाव रहेगा, तब तक वह सच्ची भक्ति नहीं कर सकता। भगवान केवल निष्कपट भक्ति को स्वीकार करते हैं और ऐसे भक्तों का विशेष ध्यान रखते हैं। वाराणसी से पधारी महात्मा सुजाता बाई जी ने कहा कि संतों का सानिध्य तभी मिलता है जब जन्म-जन्मांतर के संस्कार जागृत होते हैं। सच्चे संत ही भगवान तक पहुंचने का मार्ग दिखाते हैं। वहीं गाजीपुर प्रभारी महात्मा दयावती बाई जी ने भी अपने ज्ञानवर्धक उद्बोधन से श्रद्धालुओं को लाभान्वित किया।हवन-पूजन व भंडारे का आयोजन ज्ञानयज्ञ के तीसरे दिन विधिवत मंत्रोच्चारण के साथ हवन-पूजन सम्पन्न हुआ। आरती और विशाल भंडारे के साथ कार्यक्रम को विश्राम दिया गया। आयोजकों ने धर्मप्रेमी जनता से अधिक संख्या में पहुंचकर पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की। अतिथियों का हुआ स्वागत
कार्यक्रम में श्री रामाश्रय सिंह यादव, डॉ. संतोष यादव (ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि, सादात), अरविंद कुमार यादव, काशीनाथ यादव (मास्टर जी), नंदलाल पाल, अशोक जायसवाल, सुभाष चौहान सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इस अवसर पर आचार्य सुनील पाण्डेय, आचार्य रजनीश उपाध्याय, पंडित अमन तिवारी, पंडित आशुतोष पाण्डेय, वेदाचार्य आशीष उपाध्याय, वेदविभूषण पंकज ओझा और गोलू मिश्रा ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा-अर्चना संपन्न कराई। मंचासीन संत-महात्माओं का पुष्पमालाओं से भव्य स्वागत किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. संतोष कुमार यादव ने किया। अंत में आरती-प्रसाद वितरण और भंडारे के साथ श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

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