आजमगढ़।आजमगढ़ में आबकारी विभाग के मंडलीय असिस्टेंट कमिश्नर राजकिशोर सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे जिले में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। वायरल वीडियो में अधिकारी एक ट्रक चालक को थप्पड़ मारते हुए दिखाई दे रहे हैं। घटना ने सरकारी अधिकारियों के अधिकारों की सीमा, नागरिकों के साथ व्यवहार और सरकारी कार्रवाई की पारदर्शिता को लेकर कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।बताया जा रहा है कि घटना सठियांव टोल प्लाजा के समीप की है। आबकारी विभाग की टीम ने एक ट्रक को जांच के लिए रुकने का संकेत दिया था। आरोप है कि ट्रक चालक वाहन लेकर आगे बढ़ गया, जिसके बाद टीम ने उसका पीछा किया और कुछ किलोमीटर आगे जाकर ट्रक को रुकवाया। वायरल वीडियो में ट्रक रुकने के बाद अधिकारी चालक से बातचीत करते नजर आते हैं और कुछ ही क्षण बाद चालक को थप्पड़ मारते दिखाई देते हैं। यह दृश्य कैमरे में कैद होने के बाद सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि स्वयं असिस्टेंट कमिश्नर ने स्वीकार किया है कि ट्रक की तलाशी के दौरान कोई अवैध शराब या अन्य प्रतिबंधित सामग्री बरामद नहीं हुई। उन्होंने यह भी माना कि वाहन के सभी दस्तावेज सही पाए गए। इसके बावजूद चालक को थप्पड़ मारे जाने की बात उन्होंने यह कहते हुए स्वीकार की कि ऐसा उसे “डराने और रोकने” के उद्देश्य से किया गया था।अधिकारी का यह बयान सामने आने के बाद कई कानूनी और प्रशासनिक प्रश्न उठने लगे हैं। यदि चालक के विरुद्ध मौके पर कोई अवैध वस्तु नहीं मिली और दस्तावेज भी वैध थे, तो क्या किसी अधिकारी को सार्वजनिक रूप से शारीरिक बल प्रयोग करने का अधिकार है। क्या यह आचरण सरकारी सेवा नियमों और नागरिकों के मौलिक अधिकारों के अनुरूप है। क्या किसी व्यक्ति को केवल वाहन न रोकने के संदेह में थप्पड़ मारना उचित प्रशासनिक कार्रवाई मानी जा सकती है।read more:https://khabarentertainment.in/call-to-embrace-dr-syama-prasad-mookerjees-ideas-bjp-organizes-an-ideological-seminar/घटना का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू सरकारी कार्रवाई में प्रयुक्त वाहन को लेकर सामने आया है। उपलब्ध आरटीओ अभिलेखों के अनुसार वाहन संख्या यूपी 50 सीएस 7654 किसी सरकारी विभाग के नाम पंजीकृत नहीं है, बल्कि बिंदु मति देवी पत्नी नागेंद्र यादव, निवासी कोलपांडेय के नाम दर्ज है। वाहन से जुड़े व्यक्ति ने भी बताया कि उक्त कार का उपयोग असिस्टेंट कमिश्नर आबकारी द्वारा किया जाता है। इसके बाद सरकारी अभियान में निजी वाहन के उपयोग, उसकी स्वीकृति और नियमों के पालन को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।वायरल वीडियो ने प्रशासनिक जवाबदेही पर भी बहस छेड़ दी है। लोगों का कहना है कि यदि किसी अधिकारी का आचरण सार्वजनिक रूप से वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा है और संबंधित अधिकारी स्वयं थप्पड़ मारने की बात स्वीकार कर रहे हैं, तो पूरे प्रकरण की निष्पक्ष विभागीय जांच होनी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि सरकारी कार्रवाई के दौरान बल प्रयोग किन परिस्थितियों में किया जा सकता है और क्या इस मामले में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया था।यह मामला केवल एक थप्पड़ का नहीं, बल्कि सरकारी अधिकारों के प्रयोग, प्रशासनिक जवाबदेही और आम नागरिकों के साथ व्यवहार से जुड़ा हुआ है। यदि जांच में किसी प्रकार की प्रक्रिया संबंधी चूक, नियमों का उल्लंघन या सेवा आचरण के विपरीत कार्य पाया जाता है, तो संबंधित नियमों के तहत विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।फिलहाल वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हो रहा है। इस मामले में अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन और आबकारी विभाग पर टिकी हैं कि क्या वायरल वीडियो, अधिकारी के बयान और सामने आए तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाती है या नहीं।