गाजीपुर। रासायनिक कीटनाशकों के बढ़ते प्रयोग से मिट्टी, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर पड़ रहे दुष्प्रभाव को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों से सोलर ट्रैप और बायो ट्रैप जैसे जैविक उपकरण अपनाने की अपील की है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी उमेश कुमार ने बताया कि इन उपकरणों के उपयोग से फसलों को कीटों से सुरक्षित रखने के साथ-साथ कीटनाशकों पर होने वाला खर्च भी कम किया जा सकता है।read more:https://pahaltoday.com/the-essence-of-prasad-is-to-receive-the-blessings-of-the-deity-to-whom-it-is-offered/
उन्होंने बताया कि बागवानी फसलों में लाल और पीले रंग की स्टिकी ट्रैप पट्टियों का उपयोग भी प्रभावी है। इन्हें पेड़ों की टहनियों पर लटकाने से हानिकारक कीट आकर्षित होकर चिपक जाते हैं।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी के अनुसार सोलर ट्रैप दिन में सूर्य की रोशनी से चार्ज होता है और रात में प्रकाश देकर कीटों को आकर्षित करता है। लाइट के नीचे लगे पात्र में कीट एकत्र हो जाते हैं। इसकी कीमत 635 रुपये है, जिस पर सरकार की ओर से 431 रुपये का अनुदान दिया जा रहा है। यह उपकरण जनपद के बीज गोदामों पर उपलब्ध है।उन्होंने बताया कि बायो ट्रैप आम, अमरूद, अनार समेत अन्य बागवानी फसलों तथा कद्दूवर्गीय सब्जियों को फल मक्खी के प्रकोप से बचाने में कारगर है। इसमें लगाए जाने वाले ‘ल्योर’ से निकलने वाली गंध मादा कीट जैसी होती है, जिससे नर कीट आकर्षित होकर ट्रैप में फंस जाते हैं। बेहतर परिणाम के लिए ल्योर को 20 से 25 दिन के अंतराल पर बदलना चाहिए तथा एकत्रित कीटों को जमीन में दबा देना चाहिए। एक बायो ट्रैप की कीमत ल्योर सहित 100 रुपये निर्धारित की गई है।कृषि विभाग ने किसानों से रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम कर पर्यावरण अनुकूल तकनीकों को अपनाने की अपील की है।