जयपुर। राजस्थान के उदयपुर में आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) की आड़ में नाबालिग लड़कियों के अंडों की खरीद-फरोख्त का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि दलालों के जरिए कम उम्र की बच्चियों को निशाना बनाकर उनके अंडे 25 से 30 हजार रुपए में खरीदे जा रहे हैं, जबकि इन्हें आगे लाखों में बेचा जाता है। इस पूरे नेटवर्क में डॉक्टरों और महिला दलालों की भूमिका भी सामने आई है। एक डॉक्टर से संपर्क करने पर “प्रीमियम डोनर” के नाम पर करीब 2 लाख रुपए की मांग की गई। साथ ही कई डोनर की तस्वीरें दिखाकर उन्हें “हाई प्रोफाइल” बताया गया और अग्रिम राशि भी ऑनलाइन ली गई। आईवीएफ प्रक्रिया का कुल खर्च 5 से 6 लाख रुपए बताया गया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जांच में यह भी सामने आया कि 13 से 15 साल की नाबालिग लड़कियों के आधार कार्ड में छेड़छाड़ कर उनकी उम्र बढ़ाकर 23 साल से अधिक दिखाया जा रहा है, ताकि कानूनी शर्तों को दरकिनार किया जा सके। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बच्चियों को पैसों का लालच देकर इस प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है। दलाल पहले मेडिकल जांच के बहाने लड़कियों को बुलाते हैं और फिर उन्हें अंडादान के लिए तैयार करते हैं। कई मामलों में लड़कियों के नाम और जन्मतिथि तक बदल दी जाती है।read more:https://pahaltoday.com/heavy-storm-and-rain-destroys-pig-farm-killing-six-animals/जांच के दौरान सामने आया कि कुछ नाबालिगों की जन्मतिथि को कई साल आगे बढ़ाकर दस्तावेज तैयार किए गए, ताकि वे वयस्क दिखें। हार्मोनल इंजेक्शन का इस्तेमाल अंडों की संख्या बढ़ाने के लिए लड़कियों को लगातार हार्मोनल इंजेक्शन दिए जाते हैं। उन्हें कई दिनों तक केंद्रों में रखा जाता है और पूरी प्रक्रिया गोपनीय तरीके से पूरी की जाती है। कुछ मामलों में एक ही लड़की से कई बार अंडादान करवाए जाने की बात भी सामने आई है। यह पूरा मामला गंभीर इसलिए भी है क्योंकि भारत में अंडाणु की खरीद-फरोख्त गैरकानूनी है। नियमों के अनुसार डोनर की न्यूनतम उम्र 23 वर्ष होनी चाहिए और उसकी पहचान गोपनीय रखी जानी अनिवार्य है। लड़कियों पर गंभीर दुष्प्रभाव स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार कम उम्र में इस तरह की प्रक्रिया से लड़कियों के शरीर पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं। हार्मोनल इंजेक्शन से अंडाशय में सूजन, हार्मोन असंतुलन और भविष्य में प्रजनन क्षमता पर स्थायी असर पड़ने का खतरा रहता है। यह खुलासा स्वास्थ्य व्यवस्था और कानून के पालन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब जरूरत है कि संबंधित एजेंसियां इस नेटवर्क की गहराई से जांच कर सख्त कार्रवाई करें, ताकि नाबालिगों के शोषण को रोका जा सके।