कानपुर देहात प्रदेश के यशस्वी माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के कुशल नेतृत्व एवं दूरदर्शी नीतियों के परिणामस्वरूप सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को नई पहचान मिल रही है। मुख्यमंत्री जी की प्रेरणा से संचालित प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) ग्रामीण उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। वहीं जिलाधिकारी के मार्गदर्शन में जनपद कानपुर देहात में इस योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे पात्र लाभार्थियों को समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से योजनाओं का लाभ मिल रहा है।
इसी का जीवंत उदाहरण हैं ग्राम बादशाहपुर नौहुआ नौगांव निवासी श्री रवि कुमार, जिन्होंने पीएमएफएमई योजना के माध्यम से अपने पारंपरिक डेयरी व्यवसाय को आधुनिक उद्योग का स्वरूप दिया है।read more:https://khabarentertainment.in/asp-shubham-agarwal-reviewed-the-beat-police-personnel-at-the-police-office/
रवि कुमार लगभग 18 वर्षों से दूध एवं दुग्ध उत्पाद निर्माण के कार्य से जुड़े हैं। वर्ष 2007 में उन्होंने अपने बड़े भाई के साथ व्यवसाय की शुरुआत की तथा वर्ष 2016 से स्वयं का उद्यम संचालित करने लगे। सीमित संसाधनों के साथ साधारण भट्टी और कढ़ाई पर खोया तैयार कर कानपुर की हटिया मंडी में बेचने से शुरू हुआ यह सफर आज आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण इकाई तक पहुंच चुका है।रवि कुमार का जीवन संघर्षों से भरा रहा। उनके पिता ने होमगार्ड की नौकरी कर परिवार का पालन-पोषण किया। माता एवं एक भाई के असमय निधन के कारण उन्हें हाईस्कूल तक की शिक्षा के बाद परिवार की जिम्मेदारियां संभालनी पड़ीं और आजीविका के लिए दूध व्यवसाय से जुड़ना पड़ा।मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी की मंशा के अनुरूप तथा जिलाधिकारी के निर्देशन में संचालितपीएमएफएमई योजना के अंतर्गत रवि कुमार को ओंकार नाथ सहकारी बैंक से 15 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। इस सहायता से उन्होंने राजस्थान से आधुनिक बॉयलर एवं स्टीम जैकेट युक्त कढ़ाई मंगवाकर अपने प्रतिष्ठान में स्थापित की, जिससे उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।आज उनकी इकाई में प्रतिदिन लगभग चार कुंतल दूध का प्रसंस्करण कर एक कुंतल खोया तैयार किया जाता है, जिसकी आपूर्ति कानपुर की हटिया मंडी सहित आसपास के बाजारों में की जाती है। त्योहारों के समय उत्पादन बढ़ाकर लगभग 150 किलोग्राम प्रतिदिन तक कर दिया जाता है।नई तकनीक अपनाने से उत्पादन लागत में भी कमी आई है। पहले प्रति कुंतल दूध पर लगभग 100 किलोग्राम लकड़ी की आवश्यकता होती थी, जो अब घटकर 50 किलोग्राम रह गई है। वहीं पहले जहां तीन श्रमिकों की आवश्यकता होती थी, अब एक सहायक के सहयोग से ही कार्य सुचारु रूप से संचालित हो रहा है।रवि कुमार अपने गांव के किसानों से ही दूध का संकलन करते हैं, जिससे गुणवत्ता बनी रहती है और स्थानीय किसानों को भी नियमित बाजार उपलब्ध होता है। गुणवत्तापूर्ण उत्पाद एवं ईमानदार व्यावसायिक व्यवहार के कारण बाजार में उनकी अलग पहचान बनी है।उन्होंने बताया कि पीएमएफएमई योजना की ऑनलाइन प्रक्रिया में जिला रिसोर्स पर्सन ने मात्र दो कार्य दिवस में सभी औपचारिकताएं पूरी कराने में सहयोग किया। वहीं जिला उद्यान अधिकारी के मार्गदर्शन में आवेदन से लेकर ऋण स्वीकृति तक पूरी प्रक्रिया सरल एवं सुगम रही। बैंक द्वारा मशीन निर्माता फर्म के खाते में सीधे भुगतान किए जाने से आधुनिक मशीनों की स्थापना समय पर हो सकी।रवि कुमार का कहना है कि मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी की जनकल्याणकारी नीतियों तथा जनपद में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के कारण उन्हें अपने व्यवसाय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का अवसर मिला है। वे भविष्य में अपने परिवार, रिश्तेदारों तथा अन्य युवाओं को भी सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर स्वरोजगार स्थापित करने के लिए प्रेरित करेंगे।रवि कुमार की सफलता इस बात का प्रमाण है कि मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के दूरदर्शी नेतृत्व और जिलाधिकारी के प्रभावी मार्गदर्शन में संचालित योजनाएं ग्रामीण उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनाते हुए स्थानीय रोजगार, आधुनिक तकनीक और आर्थिक समृद्धि का मजबूत आधार तैयार कर रही हैं।