*‘स्वागत-विदाई’ पर उठे सवाल, नवागंतुक सीएमओ के आते ही 108-102 सेवा पर ‘सेटिंग’ के आरोप*  

*कानपुर देहात के जैनपुर क्षेत्र में स्थित एक होटल में कार्यक्रम के लिए ‘चंदे’ की चर्चा, कर्मचारियों के बीच यह भी चर्चा है कि- ‘एंबुलेंस कंपनी ने कराया ट्रांसफर’; सीएमओ के प्रभार लेते ही 102 सेवा में गड़बड़ी शुरू*  पहल टुडे हरिकृष्ण कश्यप कानपुर देहात में नवागंतुक मुख्य चिकित्सा अधिकारी* के प्रभार ग्रहण करते ही स्वास्थ्य विभाग में *‘चर्चाओं का सायरन’* बजने लगा है। विभागीय गलियारों में चल रही बातों ने 108-102 एंबुलेंस सेवा को फिर कटघरे में खड़ा कर दिया है।  read more:https://khabarentertainment.in/administration-gears-up-for-kanwar-yatra-divisional-commissioner-issues-strict-directives/
*‘स्वागत-विदाई’ का चंदा या मजबूरी?*  
विभागीय कर्मचारियों के बीच चर्चा है कि नवागंतुक सीएमओ साहब के स्वागत और निवर्तमान सीएमओ साहब की विदाई के लिए जिले के एक होटल में कार्यक्रम आयोजित किया गया था। आरोप है कि इस कार्यक्रम के लिए *प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों, चिकित्सा अधीक्षकों व चिकित्सकों से ‘चंदे’ के रूप में धनराशि* इकट्ठा की गई।  कुछ कर्मचारियों ने दबी जुबान कहा – *“स्वागत अपनी जगह, पर चंदा उगाही का सिस्टम गलत परंपरा है। जूनियर डॉक्टरों पर दबाव बनाया गया।”*  *‘कर्मचारियों के बीच ऐसी चर्चा है कि ट्रांसफर के पीछे एंबुलेंस कंपनी?’*  सबसे गंभीर आरोप यह है कि *नवागंतुक सीएमओ साहब को 108-102 एंबुलेंस सेवा प्रदाता कंपनी द्वारा ‘ट्रांसफर कराकर’ यहां लाया गया*। कर्मचारियों के बीच चर्चा है कि *“कंपनी ने अपनी सहूलियत के लिए ‘मैनेज’ किया।”*  *सीएमओ साहब के आते ही 102 सेवा में ‘खेल’ शुरू?*कर्मचारी ये भी कह रहे हैं कि जब से नए सीएमओ ने प्रभार लिया है, *102 एंबुलेंस सेवा के संचालन में जिम्मेदार एंबुलेंस कर्मियों ने गड़बड़ी शुरू कर दी है*। आरोप है कि *‘ट्रिप मैपुलेशन, फर्जी KM, डीजल घोटाला’* फिर से शुरू हो गया है।  सबसे चौंकाने वाली बात – *“उपरोक्त एंबुलेंस सेवा के नोडल अधिकारी का भी आंतरिक रूप से सहयोग मिलने की चर्चा है।”* यानी जो नोडल अधिकारी ने पहले FIR कराई , अब वहीअपनी*‘आंख बंद’* कर बैठे हैं।  *3 बड़े सवाल जो जवाब मांगते हैं:*  1. *स्वागत-विदाई के नाम पर चंदा उगाही* क्या शासकीय सेवा नियमावली के तहत सही है? क्या इसकी जांच होगी?  2. *सीएमओ के ट्रांसफर में एंबुलेंस कंपनी की भूमिका* का सच क्या है? क्या शासन ने इस पहलू की जांच कराई?  3. *जिलाधिकारी कानपुर देहात के कड़े निर्देशों  के बाद भी गड़बड़ी कैसे जारी है? क्या नोडल अधिकारी और नए सीएमओ की *‘जुगलबंदी’* से सेवा प्रदाता कंपनी को *‘अभयदान’* मिल गया?  *विभाग मौन, जनता बेहाल*
इन आरोपों पर नवागंतुक सीएमओ या नोडल अधिकारी डॉ. आदित्य सचान का पक्ष नहीं मिल सका। वहीं 108-102 एंबुलेंस सेवा के संचालन में गड़बड़ी किए जाने की चर्चाएं आम जनमानस के बीच एवं कुछ एंबुलेंस कर्मियों के बीच दबी जुबान से चल रही है
*निचोड़:*  अगर *‘स्वागत’* के लिए *‘चंदा’* और *‘एवं सीएमओ साहब के ट्रांसफर’* के लिए *‘कंपनी’* जिम्मेदार होने की आम जनमानस के बीच चर्चा है, तो मरीजों का *‘इलाज’* भगवान भरोसे ही होगा। कानपुर देहात की स्वास्थ्य व्यवस्था को *‘एंबुलेंस सेवा का वायरस’* बार-बार बीमार कर रहा है। जरूरत है *शासन स्तर से उच्चस्तरीय जांच* की, वरना *‘गोल्डन आवर’* में मरीज एंबुलेंस नहीं, *‘सिस्टम की चिता’* तक पहुंचेगा।

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