लखनऊ । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। प्रदेश की ग्राम पंचायतों में मौजूदा ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 25 मई को समाप्त हो गया है, लेकिन इसके बावजूद पंचायतों में उनका दखल बना रहेगा। सरकार ने पहली बार ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक की जिम्मेदारी सौंपने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने पंचायतीराज विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है और सोमवार शाम तक शासनादेश जारी होने की संभावना जताई जा रही है।read more:https://worldtrustednews.in/those-who-helped-in-making-the-parshuram-janmotsav-yatra-successful-were-honored-by-the-national-parshuram-council/
प्रदेश की कुल 57 हजार 695 ग्राम पंचायतों में यह व्यवस्था लागू होगी। अब पंचायत चुनाव होने तक गांवों में विकास कार्यों, वित्तीय व्यवस्थाओं और प्रशासनिक गतिविधियों का संचालन मौजूदा प्रधानों के माध्यम से ही किया जाएगा। अब तक परंपरागत व्यवस्था के तहत ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद संबंधित एडीओ पंचायत को प्रशासक बनाया जाता था, लेकिन इस बार सरकार ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड की तर्ज पर नया मॉडल लागू करने का फैसला लिया है। सरकार का मानना है कि इससे पंचायतों में प्रशासनिक निरंतरता बनी रहेगी और विकास कार्य प्रभावित नहीं होंगे। सूत्रों के मुताबिक प्रदेश में पंचायत चुनाव वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद कराए जाने की तैयारी चल रही है। ऐसे में करीब डेढ़ से दो वर्ष तक पंचायतों में प्रशासकीय व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। सरकार के फैसले से वर्तमान ग्राम प्रधानों में खुशी का माहौल देखा जा रहा है, क्योंकि चुनाव होने तक पंचायतों में उनकी भूमिका बनी रहेगी। वहीं दूसरी ओर भावी प्रधान प्रत्याशियों की उम्मीदों को झटका लगा है। संभावित उम्मीदवारों को अब पंचायत चुनाव के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।