रसूलाबाद में सियासी पारा चढ़ा, टिकट को लेकर भाजपा-सपा में बढ़ी हलचल

पहल टुडे हरिकृष्ण कश्यप कानपुर देहात। जनपद कानपुर देहात में आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। वर्ष 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में जिले की चारों विधानसभा सीटों पर कब्जा जमाने वाली भारतीय जनता पार्टी के लिए इस बार की राह आसान नजर नहीं आ रही है। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में तीन विधानसभा क्षेत्रों में मिली हार के बाद जिले के राजनीतिक समीकरण काफी बदले हैं। लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के पीडीए (PDA) फार्मूले ने भाजपा को बड़ा झटका दिया था। भाजपा चार में से तीन विधानसभा क्षेत्रों में पिछड़ गई थी। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव में सपा और भाजपा के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही है।
 अगर बात रसूलाबाद विधानसभा क्षेत्र की करें तो यह सीट कभी समाजवादी पार्टी का गढ़ हुआ करती थी। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा के कद्दावर नेता शिवकुमार बेरिया ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद उनका टिकट कटने पर वर्ष 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों ने इस सीट पर जीत दर्ज की।read more:https://pahaltoday.com/protest-by-the-all-gondwana-students-association-and-the-gond-community/रसूलाबाद विधानसभा सीट की खासियत यह रही कि भाजपा ने लगातार तीन चुनावों में नए चेहरों को मैदान में उतारकर जीत हासिल की, जबकि समाजवादी पार्टी ने भी नए चेहरों पर दांव लगाया, लेकिन उसे लगातार नये चेहरों के रूप में पराजय का सामना करना पड़ा। अब वर्ष 2027 के चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों में टिकट की दावेदारी तेज हो गई है।
इस बार समाजवादी पार्टी की ओर से पुराने चेहरे अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी में कई नए चेहरे विधानसभा टिकट की दौड़ में नजर आ रहे हैं। संभावित प्रत्याशी गांव-गांव संपर्क साधने के साथ ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं तक अपनी मजबूत दावेदारी पहुंचाने में जुटे हैं।टिकट को लेकर दोनों प्रमुख दलों में बढ़ती सक्रियता ने रसूलाबाद विधानसभा क्षेत्र का सियासी पारा बढ़ा दिया है।  सपा से शिवकुमार बेरिया व कुलदीप संखवार टिकट के दावेदारों में हैं। इसी प्रकार भाजपा में वर्तमान विधायक पूनम संखवार सहित पूर्व विधायक कमलेश चंद्र दिवाकर,रीता कठेरिया, अवनीश राकेश बेरिया, कृष्ण मुरारी दोहरे, देवशरण कमल सहित करीब दर्जन भर दावेदार दम भर रहे हैं। किस दल से किस चेहरे को मैदान में उतारा जाएगा और कौन प्रत्याशी चुनावी समीकरण अपने पक्ष में करने में सफल होगा, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। फिलहाल टिकट की दौड़ और बढ़ती राजनीतिक सक्रियता ने रसूलाबाद की सियासत को गरमा दिया है।

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