नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन में कही गईं बातों को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने झूठ का पुलिंदा बताया है। इसके साथ ही उन्होंने दावा करते हुए कहा की पीएम मोदी आचार संहिता का भी उल्लंघन किया है। उन्होंने हालिया राष्ट्र के नाम संबोधन पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे गरिमा के विपरीत बताया है। खड़गे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने एक आधिकारिक मंच का उपयोग विशुद्ध रूप से राजनीतिक भाषण देने के लिए किया, जिसमें विरोधियों पर कीचड़ उछालने और असत्य दावों के सिवाय कुछ नहीं था। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए खड़गे ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में अपनी कोई ठोस उपलब्धि न दिखा पाने के कारण प्रधानमंत्री हताशा और निराशा में हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब चुनाव आचार संहिता लागू है, तब भी प्रधानमंत्री ने सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर अपने विरोधियों पर निशाना साधा, जो लोकतंत्र और भारतीय संविधान का खुला अपमान है। खड़गे ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री ने अपने पूरे भाषण में 59 बार कांग्रेस का जिक्र किया, जबकि महिलाओं का नाम बमुश्किल ही लिया।read more:https://khabarentertainment.in/nari-shakti-vandan-act-to-ensure-the-active-role-of-women-power-in-nation-building/ उन्होंने कहा कि इससे सरकार की प्राथमिकताएं स्पष्ट हो जाती हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि भाजपा के लिए महिलाएं कभी प्राथमिकता में नहीं रहीं और केवल कांग्रेस ही वास्तव में उनके साथ खड़ी है।महिला आरक्षण के मुद्दे पर खड़गे ने याद दिलाया कि कांग्रेस ने हमेशा इस दिशा में कदम उठाए हैं। उन्होंने 2010 में राज्यसभा में महिला आरक्षण बिल पारित करवाया था ताकि वह निष्प्रभावी न हो, लेकिन भाजपा तब इसे लोकसभा में पारित नहीं करा सकी। उन्होंने मांग की कि सरकार 2023 के कानून के तहत मौजूदा 543 लोकसभा सीटों पर महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण तुरंत लागू करे और इसे परिसीमन के बहाने न टाले। अपनी पार्टी की विरासत का जिक्र करते हुए खड़गे ने कहा कि हरित क्रांति से लेकर सूचना के अधिकार, मनरेगा और खाद्य सुरक्षा जैसे ऐतिहासिक कानून कांग्रेस की देन हैं। उन्होंने हाथरस, उन्नाव और महिला पहलवानों के मामलों का उदाहरण देते हुए भाजपा पर महिला-विरोधी होने का आरोप लगाया। खड़गे ने अंत में कहा कि 12.5 साल सत्ता में रहने के बाद भी सरकार महंगाई और गिरती अर्थव्यवस्था जैसे बुनियादी मुद्दों का समाधान निकालने में पूरी तरह विफल रही है।