सलाखों के बीच शांति: कानपुर देहात जेल में बना ‘बुद्ध शांति पार्क’, बंदियों को मिला आत्मचिंतन का नया ठिकाना

कानपुर देहात।अब जिला कारागार सिर्फ सजा का घर नहीं, सुधार का मंदिर भी बन गया है। जेल अधीक्षक धीरज कुमार सिन्हा, जेलर अरुण कुमार सिंह और डिप्टी जेलर डॉ. राजेश कुमार की पहल पर कारागार परिसर में हरे-भरे लॉन, रंग-बिरंगे फूलों से सजा एक खूबसूरत ‘शांति पार्क’ तैयार किया गया है।पार्क के मध्य में भगवान गौतम बुद्ध की विशालकाय प्रतिमा स्थापित की गई है। शनिवार को कारागार के त्रैमासिक निरीक्षण के दौरान माननीय जनपद न्यायाधीश श्री रविंद्र सिंह, माननीय सीजेएम कानपुर देहात श्री रणविजय सिंह, डीएलएसए की सचिव श्रीमती नूपुर श्रीवास्तव, जिलाधिकारी कपिल सिंह एवं पुलिस अधीक्षक श्रद्धा नरेंद्र पांडेय ने संयुक्त रूप से फीता काटकर प्रतिमा का अनावरण किया। इस मौके पर माननीयजनपद न्यायाधीश के साथ प्रमुख रूप से मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कानपुर  देहात श्री रणविजय सिंह, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती नूपुर श्रीवास्तव, जिलाधिकारी कपिल सिंह, पुलिस अधीक्षक श्रद्धा नरेंद्र पांडेय, कारागार अधीक्षक धीरज कुमार सिन्हा, जेलर अरुण कुमार सिंह, डिप्टी जेलर डॉ. राजेश कुमार, कारागार शिक्षक उमेश मिश्रा सहित अन्य अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।माननीय जनपद न्यायाधीश व सभी प्रशासनिक अधिकारियों ने कारागार प्रशासन की इस मानवीय पहल की खुले दिल से सराहना की।read more:https://pahaltoday.com/the-strait-of-hormuz-will-not-be-opened-by-agreement-alone-removing-marine-mines-will-take-time/
बुद्ध के उपदेश, बंदियों के लिए संजीवनी: कारागार प्रशासन अब बुद्ध के सिद्धांतों के जरिए बंदियों के मन को छूने का प्रयास कर रहा है:
– *”क्रोध को प्रेम से जीतो, बुराई को अच्छाई से”* – हिंसा और नफरत पर नियंत्रण
– *”हजारों दीप एक दीप से जल सकते हैं, पर उसकी रोशनी कम नहीं होती”* – ज्ञान और करुणा बांटने की प्रेरणा
– *”मन ही सब कुछ है, जैसा तुम सोचते हो वैसे ही बन जाते हो”* – सकारात्मक सोच से जीवन बदलो
*अंगुलिमाल से प्रेरणा:*
इतिहास गवाह है कि भगवान बुद्ध ने अंगुलिमाल जैसे खूंखार डाकू को भी करुणा से बदल दिया था। उसी भावना के साथ यह पार्क बनाया गया है, ताकि हर बंदी को पुनर्वास और नई शुरुआत का मौका मिले।
*पार्क का मकसद:* बंदियों को मानसिक शांति देना, आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना।

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